Recep Tayyip Erdogan: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने ईरान और इजरायल के बीच जारी विनाशकारी जंग पर वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए एक गंभीर चेतावनी दी है। एर्दोगन ने कहा कि हालांकि यह युद्ध इजरायल द्वारा थोपा गया है, लेकिन इसकी सबसे भारी और पहली कीमत मुसलमान चुका रहे हैं, जिसके बाद पूरी मानवता पर इसका संकट मंडरा रहा है। उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि वे न केवल ईरान को निशाना बना रहे हैं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लेबनान पर कब्जा करने की अपनी विस्तारवादी योजना को भी अंजाम दे रहे हैं। एर्दोगन का यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच मुस्लिम देशों को एकजुट करने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
तेहरान से रियाद तक साझा दर्द: एर्दोगन ने पूछा- आंसुओं में क्या फर्क है?
ईरान और अमेरिका के हमलों का जिक्र करते हुए एर्दोगन ने क्षेत्रीय एकता पर जोर दिया। उन्होंने भावुक होते हुए सवाल किया कि इस्फ़हान, तब्रीज़ और तेहरान में बहने वाले आंसुओं और एरबिल, अम्मान, बगदाद, बेरूत, सना, दोहा या रियाद जैसे शहरों में बहने वाले आंसुओं में क्या अंतर है? उन्होंने कहा कि नरसंहार करने वाले इस गिरोह (इजरायली नेतृत्व) की नज़र में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे नाम अली, उमर, आयशा या हसन हैं। एर्दोगन ने स्पष्ट किया कि जब यह युद्ध का बादल छंटेगा, तो हम पड़ोसी और भाई के रूप में एक-दूसरे के सामने होंगे। बमों और मिसाइलों के शांत होने के बाद भी हमें इसी धरती पर साथ रहना है, और इस वास्तविकता को किसी को नहीं भूलना चाहिए।
ईरान-अमेरिका गतिरोध बरकरार: होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव चरम पर
गुरुवार को ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहरा गया। दोनों पक्षों ने बातचीत की संभावनाओं को नकारते हुए अपने रुख और कड़े कर लिए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में एक और भीषण सैन्य टकराव की आशंका पैदा हो गई है। हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक युद्ध क्षेत्र के करीब पहुंच रहे हैं, वहीं तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर अपनी सैन्य पकड़ और मजबूत कर ली है। ईरान की राजधानी और अन्य प्रमुख शहरों में भारी हवाई हमलों की खबरें आ रही हैं, जिसके जवाब में ईरान की मिसाइलों ने इजरायल के आसमान में दिन भर सायरन बजने पर मजबूर कर दिया।
वाशिंगटन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य: परमाणु कार्यक्रम और सशस्त्र समूहों पर नजर
इस युद्ध में अमेरिका के लक्ष्य समय के साथ और अधिक महत्वाकांक्षी होते जा रहे हैं। वाशिंगटन अब न केवल युद्धविराम चाहता है, बल्कि वह ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह से निष्क्रिय करना चाहता है ताकि वे भविष्य में कोई खतरा न बन सकें। इसके साथ ही, अमेरिका क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न सशस्त्र समूहों के लिए तेहरान के वित्तीय और सैन्य समर्थन को भी हमेशा के लिए समाप्त करने के प्रयास में है। एक समय तो वाशिंगटन ने ईरान की वर्तमान धर्मतांत्रिक सरकार (Theocratic Government) को उखाड़ फेंकने का भी दबाव बनाया था, जो वर्तमान संघर्ष की गंभीरता को और बढ़ा देता है।
क्षेत्रीय शक्तियों के प्रयास: हमलों को रोकने के लिए खाड़ी देशों की दौड़
युद्ध की इस भयावह स्थिति के बीच खाड़ी देश सक्रिय रूप से हमलों को रोकने और तनाव कम करने के कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हैं। इस युद्ध का स्वरूप अब इस बात पर निर्भर हो गया है कि कौन सा पक्ष सबसे अधिक नुकसान सहने की क्षमता रखता है। इजरायल में ईरान की ओर से आ रही मिसाइलों की बौछार ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। खाड़ी देशों को डर है कि यदि यह संघर्ष और फैला, तो उनकी अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था भी इसकी चपेट में आ जाएगी। एर्दोगन का बयान इसी डर और साझा भविष्य की चिंता को प्रतिबिंबित करता है।
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