Epstein Files Kiswa Disclosure : अमेरिका में हाल ही में सार्वजनिक की गई नई ‘एपस्टीन फाइल्स’ ने पूरी दुनिया, विशेषकर मुस्लिम जगत में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इन दस्तावेजों में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा (मक्का) पर चढ़ाया जाने वाला पवित्र काला कपड़ा, जिसे ‘किसवा’ कहा जाता है, गोपनीय तरीके से अमेरिका भेजा गया था। सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि यह पवित्र खेप किसी धार्मिक संस्थान को नहीं, बल्कि कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के फ्लोरिडा स्थित निजी आवास पर पहुँचाई गई थी। यह जानकारी सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग उठने लगी है।
वर्ष 2017 का घटनाक्रम: एक सजायाफ्ता मुजरिम और पवित्र उपहार
दस्तावेजों के मुताबिक, यह संदिग्ध लेन-देन वर्ष 2017 में हुआ था। गौर करने वाली बात यह है कि उस समय तक जेफ्री एपस्टीन की छवि एक रसूखदार निवेश बैंकर की नहीं, बल्कि एक सजायाफ्ता अपराधी की थी। वह न केवल यौन अपराधों के मामले में जेल की सजा काट चुका था, बल्कि आधिकारिक रूप से एक पंजीकृत ‘सेक्स ऑफेंडर’ के रूप में चिन्हित था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस रसूख या संबंध के आधार पर एक ऐसी वस्तु, जिसे करोड़ों मुसलमान अपनी जान से ज्यादा कीमती मानते हैं, एक ऐसे व्यक्ति की दहलीज तक पहुँच गई जिसका चरित्र वैश्विक स्तर पर दागदार था।
ईमेल्स का जाल: कैसे की गई किसवा के टुकड़ों की व्यवस्था?
इन फाइलों में फरवरी और मार्च 2017 के बीच किए गए कई गोपनीय ईमेल्स शामिल हैं। ये ईमेल्स अजीजी अल-अहमदी और अब्दुल्ला अल-मारी नाम के व्यक्तियों के बीच हुए थे। इन संदेशों से स्पष्ट होता है कि काबा के किसवा से जुड़े तीन अलग-अलग टुकड़ों की व्यवस्था की गई थी। इन्हें ब्रिटिश एयरवेज के माध्यम से फ्लोरिडा भेजा गया। ईमेल्स में अल-अहमदी ने इस कपड़े की धार्मिक महत्ता का वर्णन करते हुए लिखा था कि इसे करोड़ों जायरीन (तीर्थयात्री) स्पर्श करते हैं और इस पर अपनी दुआएं मांगते हैं। यह पूरी प्रक्रिया इतनी गोपनीय रखी गई थी कि एक टुकड़े को कस्टम जांच से बचाने के लिए केवल ‘आर्टवर्क’ (कलाकृति) के रूप में घोषित किया गया था।
तीन अलग-अलग टुकड़े: पवित्रता और कूटनीतिक रहस्य
रिपोर्ट के अनुसार, जो तीन टुकड़े एपस्टीन को भेजे गए थे, उनमें से एक काबा के अंदरूनी हिस्से का था, दूसरा बाहरी आवरण का हिस्सा था और तीसरा उसी का एक अप्रयुक्त कपड़ा था। ईमेल्स में इस बात पर जोर दिया गया था कि ये कपड़े केवल कपड़े के टुकड़े नहीं, बल्कि आस्था का उच्चतम केंद्र हैं। हालांकि, इन फाइल्स में यह कहीं भी दर्ज नहीं है कि सऊदी अरब के अधिकारियों या किसी अधिकृत संस्था को इस बात की जानकारी थी या नहीं। यह अब भी एक रहस्य बना हुआ है कि इन पवित्र वस्तुओं का सौदा हुआ था या इन्हें किसी प्रभाव के तहत उपहार स्वरूप दिया गया था।
खुफिया एजेंसियों का कनेक्शन: एफबीआई मेमो में बड़ा दावा
इन फाइलों के साथ जारी एक एफबीआई (FBI) मेमो ने मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है। मेमो में दावा किया गया है कि जेफ्री एपस्टीन के संबंध केवल अमीर और प्रभावशाली लोगों से ही नहीं थे, बल्कि वह अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों के लिए भी काम करता था। दस्तावेजों में उसे इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक का करीबी सहयोगी बताया गया है। इसके अलावा, एपस्टीन की सहायक द्वारा भेजे गए ‘डीएनए टेस्ट किट’ का भी जिक्र है, जिसका उद्देश्य अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। क्या यह किसवा का मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक खेल का हिस्सा था? यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
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