Epstein Files 2026: जेफरी एपस्टीन और रूस का कनेक्शन, पुतिन से मिलने की कोशिशों का बड़ा खुलासा

एपस्टीन फाइल्स 2026 ने एक ऐसे राज से पर्दा उठाया है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। दस्तावेजों के अनुसार, जेफरी एपस्टीन ने रूसी राजनयिकों के माध्यम से राष्ट्रपति पुतिन से मिलने की कई बार कोशिश की थी। क्या वह रूस के लिए जासूसी कर रहा था या उसके पास मॉस्को के बड़े नेताओं की कोई कमजोरी थी?

Epstein Files 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 9, 2026

Epstein Files 2026: कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन के काले कारनामों की फेहरिस्त में अब एक नया और चौंकाने वाला अध्याय जुड़ गया है। हाल ही में सामने आए गोपनीय दस्तावेजों ने खुलासा किया है कि एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और क्रेमलिन के शीर्ष हलकों में घुसपैठ करने के लिए बेहद उत्सुक था। वह न केवल पुतिन से मिलना चाहता था, बल्कि उन्हें पश्चिमी निवेश आकर्षित करने और रूस में बड़े आर्थिक सुधारों को लेकर गोपनीय सलाह देने की योजना भी बना रहा था। इन नए खुलासों के बाद अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने एपस्टीन के रूसी संपर्कों और उसकी संदिग्ध गतिविधियों की गहराई से पड़ताल शुरू कर दी है।

पुतिन से मुलाकात का प्रयास: नॉर्वेजियन राजनेता के जरिए बिछाया जाल

साल 2018 के दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बैठक सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा था। उसने नॉर्वे के प्रभावशाली राजनेता थोर्ब्योन जागलैंड को ईमेल भेजकर सुझाव दिया था कि पुतिन को अपने विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को उससे बातचीत के लिए भेजना चाहिए। एपस्टीन का यह दावा था कि वह पुतिन को एक ऐसी रणनीति समझा सकता है जिससे रूस को पश्चिमी देशों से भारी निवेश और आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वह खुद को एक वैश्विक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करना चाहता था।

रूसी राजदूत विटाली चुरकिन के साथ घनिष्ठता और ट्रंप का जिक्र

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में रूस के पूर्व राजदूत विटाली चुरकिन के साथ एपस्टीन के नियमित और करीबी संबंध थे। चुरकिन की अचानक मृत्यु के बाद, एपस्टीन ने उनके बेटे मैक्सिम की एक प्रतिष्ठित वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी लगवाने का वादा किया था। एपस्टीन अक्सर चुरकिन की तारीफ करता था और उसका दावा था कि उसकी बातचीत के बाद चुरकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को बेहतर ढंग से समझने लगे थे। यह संबंध एपस्टीन की रूस के कूटनीतिक गलियारों में गहरी पैठ का प्रमाण माना जा रहा है।

खुफिया एजेंसियों का संदेह: क्या एपस्टीन रूसी जासूसों का मोहरा था?

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इस मामले में एपस्टीन के रूसी खुफिया एजेंसियों के साथ संभावित संबंधों की नई जांच के आदेश दिए हैं। पश्चिमी खुफिया समुदायों में यह संदेह गहरा रहा है कि एपस्टीन के सेक्स स्कैंडल और उसके पास मौजूद प्रभावशाली लोगों की गोपनीय जानकारी के पीछे रूसी जासूसों का हाथ हो सकता है। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार और जासूसी की काल्पनिक थ्योरी बताकर खारिज कर दिया है।

एहुद बराक का बयान और सेंट पीटर्सबर्ग सम्मेलन का रहस्य

इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक ने स्वीकार किया है कि एपस्टीन की रूसी मामलों में गहरी दिलचस्पी थी, लेकिन उन्होंने कभी उसका नाम क्रेमलिन में आगे नहीं बढ़ाया। एपस्टीन ने एक बार दावा किया था कि उसने सेंट पीटर्सबर्ग सम्मेलन में पुतिन के निमंत्रण को केवल इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उसे अपनी निजता की चिंता थी। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि क्या पुतिन ने वास्तव में उसे कभी आमंत्रित किया था या यह एपस्टीन का खुद को बड़ा दिखाने का एक स्वांग था।

एफएसबी कनेक्शन और ब्लैकमेलिंग की साजिश: एक गहरा रहस्य

दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव से भी थे, जो रूस की खुफिया सेवा (FSB) अकादमी के स्नातक और बाद में उप आर्थिक मंत्री रहे। बेल्याकोव के साथ ईमेल संवाद में एपस्टीन ने रूसी निवेश फंडों में हर संभव मदद करने का वादा किया था। साल 2015 के एक गुप्त पत्राचार में एपस्टीन ने न्यूयॉर्क में एक रूसी लड़की द्वारा कारोबारियों को ब्लैकमेल करने की जानकारी भी मांगी थी। यह दर्शाता है कि उसका प्रभाव केवल व्यापार और राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वह ब्लैकमेलिंग जैसे संदिग्ध ऑपरेशनों में भी सक्रिय रूप से जानकारी जुटा रहा था।

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