‘बंदूक की नोक पर चुनाव’, PoK में चुनावी प्रक्रिया को लेकर AAC का बड़ा दावा

इस्लामाबाद पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का साफ कहना है कि पूरे चुनाव प्रक्रिया को 'बंदूक की नोक पर' चलाया जा रहा है और इसे लोकतंत्र का नाम देकर महज एक दिखावा किया जा रहा है। जेएएसी नेताओं का दावा है कि इन चुनावों में न तो स्वतंत्रता है, न निष्पक्षता और न ही कोई वास्तविक लोकतांत्रिक विश्वसनीयता है। सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए एएसी के प्रमुख नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने संगठन

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Published On :

अगस्त 3, 2026

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इस्लामाबाद
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच अवामी एक्शन कमेटी (AAC) ने पाकिस्तान की सेना और प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का साफ कहना है कि पूरे चुनाव प्रक्रिया को 'बंदूक की नोक पर' चलाया जा रहा है और इसे लोकतंत्र का नाम देकर महज एक दिखावा किया जा रहा है। जेएएसी नेताओं का दावा है कि इन चुनावों में न तो स्वतंत्रता है, न निष्पक्षता और न ही कोई वास्तविक लोकतांत्रिक विश्वसनीयता है।

सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए एएसी के प्रमुख नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने संगठन की ओर से स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि कमेटी इस पूरे आयोजन को 'लोकतंत्र के नाम पर चुनावी ड्रामा' मानती है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवामी एक्शन कमेटी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बिल्कुल नहीं है। हम तो हमेशा से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की मांग करते आए हैं। लेकिन हम चुनाव के नाम पर हो रही धोखाधड़ी और दबाव की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उमर नजीर कश्मीरी ने आगे बताया कि पीओके में चुनाव प्रक्रिया को शुरू से ही सेना के दबाव में चलाया जा रहा है। उनके अनुसार, समान अवसर देने की बजाय पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 95 प्रतिशत असली और लोकप्रिय कश्मीरी प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने से जानबूझकर रोका गया है। कई उम्मीदवारों पर दबाव बनाया गया, धमकियां दी गईं और कुछ को प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। इस वजह से पूरी चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पहले चरण के चुनाव का जिक्र करते हुए उमर नजीर ने कहा कि पीओके की बड़ी आबादी ने पहले ही इन चुनावों का खुला बहिष्कार कर दिया था। लोगों ने बूथों से दूर रहकर अपना विरोध दर्ज कराया। अब दूसरे चरण में भी यही माहौल बना हुआ है। कई क्षेत्रों से बहिष्कार की मांगें जोर पकड़ रही हैं और आम नागरिकों में इन चुनावों के प्रति गहरा अविश्वास देखने को मिल रहा है। एएसी का मानना है कि जब जनता का बड़ा हिस्सा प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर रहा है तो ऐसे चुनावों को लोकतांत्रिक कहना बेमानी है।

उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि मौजूदा सरकारी ढांचा लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसलिए पूरे इलाके में प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था को नए सिरे से गढ़ने की जरूरत है। तभी लोगों की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी और जवाबदेही का माहौल बनेगा। इस दौरान उमर नजीर ने स्पष्ट किया कि एएसी का संघर्ष सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। समिति 'हक-ए-हुकमरानी' यानी स्व-शासन के अधिकार और 'हक-ए-मालिकियत' यानी अपनी जमीन और संसाधनों पर मालिकाना हक के लिए अपना आंदोलन लगातार जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि कमेटी का लक्ष्य लोगों के उन अधिकारों को वापस दिलाना है जो लंबे समय से छीने गए हैं।

दूसरी ओर पाकिस्तान के आधिकारिक पक्ष की बात करें तो वहां के अधिकारियों का दावा है कि पीओके असेंबली चुनाव पूरी तरह कानून के अनुसार और उचित सुरक्षा व्यवस्था के साथ हो रहे हैं। उन्होंने किसी भी दबाव या हस्तक्षेप से इनकार किया है। हालांकि अवामी एक्शन कमेटी के इन गंभीर आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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