नामांकन रद्द होने से बदला चुनावी गणित, पंजाब निकाय चुनाव में BJP की रणनीति पर नजर

चंडीगढ़  पंजाब के निकाय चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है तो कई में आमने-सामने की सीधी टक्कर है। इसकी दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं एक तो कई वार्डों में कुछ प्रत्याशियों के प्रचार में धार नहीं दिख रही और दूसरी, कई जगह मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी ही मैदान से बाहर हैं। आठ नगर निगमों और 97 नगर परिषदों व नगर पंचायतों की बात करें तो आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तो लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं मगर भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस जैसे मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी मैदान से बाहर

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Published On :

मई 25, 2026

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चंडीगढ़ 
पंजाब के निकाय चुनाव में कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है तो कई में आमने-सामने की सीधी टक्कर है। इसकी दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं एक तो कई वार्डों में कुछ प्रत्याशियों के प्रचार में धार नहीं दिख रही और दूसरी, कई जगह मुख्य पार्टियों के प्रत्याशी ही मैदान से बाहर हैं। आठ नगर निगमों और 97 नगर परिषदों व नगर पंचायतों की बात करें तो आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी तो लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं मगर भाजपा, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस जैसे मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी मैदान से बाहर हैं। 

शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग आरोप लगाते हैं कि यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कई वार्डों में जानबूझकर उनके मजबूत प्रत्याशियों के नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए हैं। ऐसा करने का कोई मजबूत आधार भी नहीं बताया जा रहा है। कई प्रत्याशी अपना दुखड़ा लेकर राज्य चुनाव आयोग तक भी पहुंचे थे जिनकी शिकायतें संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। उधर, बहुत से वॉर्डों में सिर्फ दो ही प्रत्याशी हैं जबकि बठिंडा नगर निगम के वॉर्ड नंबर 30 और सुनाम नगर परिषद का वॉर्ड नंबर 15, ये दो वॉर्ड ऐसे हैं जहां 10-10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

आठ नगर निगमों में प्रत्याशियों की स्थिति
105 नगर निकायों में से आठ नगर निगमों के चुनाव सभी दलों के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल हैं क्योंकि इन निगमों के अंतर्गत बड़ा शहरी क्षेत्र आता है। सभी नगर निगमों में 50-50 वार्ड हैं मगर बहुत वार्डों में मुख्य सियासी दलों के प्रत्याशी ही चुनाव रण से बाहर हैं जबकि आप के प्रत्याशी करीबन हर सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। बरनाला नगर निगम में भाजपा के 26 प्रत्याशी, कांग्रेस के 36 और शिअद के 27 प्रत्याशी, बठिंडा नगर निगम में भाजपा के 42, कांग्रेस के 43 और शिअद के 46 प्रत्याशी, अबोहर नगर निगम में भाजपा के 49, कांग्रेस के 31 और शिअद के 33 प्रत्याशी, बटाला नगर निगम में भाजपा के 22, कांग्रेस के 48 और शिअद के 21 प्रत्याशी, बरनाला नगर निगम में भाजपा व शिअद के 27-27 प्रत्याशी और कांग्रेस के 39 प्रत्याशी, कपूरथला नगर निगम में भाजपा के 33, कांग्रेस के 50, शिअद के 23 प्रत्याशी, मोगा नगर निगम में भाजपा के 40, कांग्रेस के 48 व शिअद के 38 प्रत्याशी और पठानकोट नगर निगम में भाजपा-कांग्रेस के 50-50 जबकि शिअद के 30 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।

भाजपा केंद्रीय योजनाओं के गणित के सहारे
भाजपा ने हर नगर निकाय की अलग-अलग रणनीति खास ढंग से बनाई है। भाजपा जानती है कि पंजाब में उनकी सरकार नहीं है लिहाजा पार्टी ने केंद्रीय योजनाओं के गणित के आधार पर अपना होमवर्क किया है। भाजपा ने हर नगर निकाय के लिए हजारों परचे छपवाए हैं जिसमें यह बताया गया है कि संबंधित वार्ड में स्वच्छ भारत मिशन शहरी, अमरूत योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मानधन श्रम योगी योजना, एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना व प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कितने लोगों को लाभ मिला है। यह भी बताया गया है कि इन योजनाओं में साल 2015-16 से साल 2025-26 तक कितने करोड़ संबंधित नगर निकाय के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहुंचे। इसके अतिरिक्त मतदाताओं को यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने अपने 11 साल के कार्यकाल में पंथक, पंजाब व पंजाबियों से जुड़े क्या-क्या बड़े काम किए हैं। इसमें साल 1984 के दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलवाने का भी जिक्र है।

 

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