Middle East War : इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। इस भीषण संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पूर्व महानिदेशक और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल-बरदेई ने एक बड़ा बयान जारी किया है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ के अनुसार, अल-बरदेई ने खाड़ी देशों और संयुक्त राष्ट्र (UN) से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख को तत्काल नियंत्रित करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप को समय रहते नहीं रोका गया, तो उनकी नीतियां पूरे मध्य पूर्व को एक विनाशकारी ‘आग के गोले’ में तब्दील कर देंगी।
सोशल मीडिया पर ट्रंप की नीतियों की तीखी आलोचना
अल-बरदेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अरबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अपनी चिंता व्यक्त की। अरबी भाषा में लिखे अपने संदेश में उन्होंने खाड़ी देशों की सरकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने पूरे सामर्थ्य और कूटनीतिक प्रभाव का उपयोग कर ट्रंप के कदमों पर लगाम लगाएं। उन्होंने ट्रंप की युद्धोन्मादी नीतियों की निंदा करते हुए उन्हें “उन्मादी” तक कह डाला। वहीं, अंग्रेजी में किए गए अपने पोस्ट में उन्होंने सीधे संयुक्त राष्ट्र की सार्थकता पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या इस वैश्विक पागलपन और तबाही को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास कोई रास्ता नहीं बचा है?”
ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम और बढ़ता परमाणु खतरा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का नया और सख्त अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने मांग की है कि ईरान या तो तुरंत अमेरिका की शर्तों पर समझौता करे या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोल दे। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर ईरान नहीं झुकता, तो उसे ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे जो इतिहास ने पहले कभी नहीं देखे। दूसरी ओर, ईरान ने इस अल्टीमेटम को सिरे से खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता से समझौता न करने की बात दोहराई है, जिससे परमाणु युद्ध का खतरा और गहरा गया है।
युद्ध की विभीषिका: हजारों मौतें और वैश्विक आर्थिक संकट
फरवरी के अंत से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के इस त्रिकोणीय संघर्ष ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। अब तक इस युद्ध में हजारों बेगुनाह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हमलों का दायरा सैन्य ठिकानों से बढ़कर नागरिक क्षेत्रों तक पहुंच गया है, जिससे युद्ध अपराधों की संभावना बढ़ गई है। इस युद्ध का असर केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है; वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और शिपिंग रूट बाधित होने से दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है।
शांति की अपील और कूटनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता
1997 से 2009 तक IAEA के प्रमुख रहे अल-बरदेई, जो स्वयं 2005 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हैं, ने कहा कि अमेरिका की ‘चुनिंदा युद्ध’ (Selective War) की नीति हमेशा से विनाशकारी रही है। उन्होंने खाड़ी देशों से आग्रह किया कि वे केवल मूकदर्शक न बनें, बल्कि सक्रिय राजनयिक हस्तक्षेप करें। उनका मानना है कि यदि अब भी कड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो यह संघर्ष केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति को हमेशा के लिए अस्थिर कर देगा।
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