Eid Ul-Fitr: कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उनके भाषण में धार्मिक उल्लास के साथ-साथ तीखा राजनीतिक तेवर भी देखने को मिला। आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य और देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए सत्ता से बाहर करने का आह्वान किया।
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देश बचाने के लिए एकजुटता की अपील
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत शायराना अंदाज में की। उन्होंने “सरफरोशी की तमन्ना” और “खुदी को कर बुलंद इतना” जैसे सुप्रसिद्ध शेरों के जरिए जनता में जोश भरा। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस का प्राथमिक लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि देश को भाजपा के प्रभाव से मुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि बंगाल की तरक्की और देश की सुरक्षा के लिए इस “अत्याचारी शासन” को उखाड़ फेंकना अनिवार्य है।
NRC और नागरिक अधिकारों पर तीखा हमला

नागरिकों के रजिस्टर (SIR/NRC) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है। उन्होंने अपने संघर्ष को याद दिलाते हुए कहा कि वे सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जनता के हक के लिए लड़ी हैं। बनर्जी ने कसम खाई कि वह प्रधानमंत्री मोदी को बंगाल के लोगों के अधिकार छीनने नहीं देंगी। उन्होंने भाजपा को “चोरों और गुंडों की पार्टी” करार देते हुए आरोप लगाया कि वे समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं।
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“अघोषित राष्ट्रपति शासन” और प्रशासनिक दखल का आरोप
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य के प्रशासनिक कामकाज में जबरन हस्तक्षेप करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने वर्तमान स्थिति की तुलना ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ से की। बनर्जी के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियां और सरकारी तंत्र चुनाव के दौरान निष्पक्षता को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने जनता को आगाह किया कि सीमावर्ती इलाकों के जरिए राज्य में अशांति और दंगे भड़काने की साजिश रची जा रही है ताकि परोक्ष रूप से राष्ट्रपति शासन थोपा जा सके।
गद्दारों और बाहरी ताकतों से सावधान रहने की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जिन्हें उन्होंने ‘गद्दार’ कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भाजपा से पैसे लेकर वोट बांटने का काम कर रहे हैं। बंगाल की एकता की रक्षा करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, “जो डरते हैं वे मर जाते हैं, और जो लड़ते हैं वही जीतते हैं।” उन्होंने जनता से किसी भी प्रकार के प्रलोभन या रिश्वत को स्वीकार न करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया।
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