MP में महुआ से बनी मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी फ्री कराने की होगी कोशिश

भोपाल. प्रदेश के आदिवासियों के स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री किया जाएगा। यह प्रविधान आबकारी नीति 2026 में किया गया है। इसके साथ ही शराब ठेके में साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (एफडी) मान्य नहीं की जाएगी। प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई बैंक गारंटी ही मान्य होंगी। 2021-22 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महुआ को हेरिटेज लिकर के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत पारंपरिक महुआ से हेरिटेज

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Published On :

फ़रवरी 20, 2026

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भोपाल.

प्रदेश के आदिवासियों के स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए उनके राज्यों की हेरिटेज अथवा विशेष मदिरा को प्रदेश में ड्यूटी फ्री किया जाएगा। यह प्रविधान आबकारी नीति 2026 में किया गया है। इसके साथ ही शराब ठेके में साधारण बैंक गारंटी एवं सावधि जमा (एफडी) मान्य नहीं की जाएगी। प्रतिभूति राशि के रूप में सिर्फ ई-चालान/ई बैंक गारंटी ही मान्य होंगी।

2021-22 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महुआ को हेरिटेज लिकर के रूप में मान्यता दी गई है। इसके तहत पारंपरिक महुआ से हेरिटेज मदिरा बनाने के लिए सरकार द्वारा आदिवासी स्वयं सहायता समूहों को लाइसेंस, आधुनिक प्रशिक्षण और कर छूट दी जा रही है। इसे अन्य राज्यों में प्रोत्साहित करने के लिए नीति में प्रविधान किया गया है कि कोई राज्य यदि महुआ से बनी मप्र की मदिरा को ड्यूटी फ्री करता है तो यहां भी उनके उत्पाद को ड्यूटी फ्री किया जा सकेगा।

आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि
प्रदेश की सभी 3,553 शराब दुकानों की नीलामी ई-टेंडर और ई-आक्शन के माध्यम से होगी। दुकानें आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ नीलाम होंगी। आरक्षित मूल्य के आधार पर जिले के समूह को तीन-चार बैच में वर्गीकृत किया जाएगा। नीति में शराब की ड्यूटी दरें, विनिर्माण इकाई, बार आदि की लाइसेंस फीस यथावत रखी है। शराब विनिर्माताओं को पूर्व वर्षों की तरह अपने उत्पाद की कीमत के अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। विनिर्माता पोर्टल पर निर्धारित व्यवस्था अनुसार अपने उत्पाद की कीमत घोषित कर सकेंगे। देश के बाहर मदिरा के निर्यात को प्रोत्साहन देने लिए फीस में संशोधन, लेबल पंजीयन में सरलीकरण आदि प्रविधान किया गया है।

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