अनुराग वर्मा पर ED का शिकंजा, ₹348 करोड़ के CLU मामले में फिर समन

जालंधर. पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जमीन घोटाले से जुड़े एक मनी लांन्ड्रिंग मामले में फिर समन जारी कर सात सितंबर को जालंधर स्थित जोनल कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले ईडी ने अनुराग वर्मा को 31 अगस्त को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, वह उस दिन ईडी के सामने पेश नहीं हो सके थे। उन्होंने जांच एजेंसी से समय बढ़ाने की मांग करते हुए अनुरोध किया था कि मांगे गए जरूरी दस्तावेज और रिकार्ड इकट्ठा करने के

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Published On :

सितम्बर 2, 2026

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जालंधर.

पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने जमीन घोटाले से जुड़े एक मनी लांन्ड्रिंग मामले में फिर समन जारी कर सात सितंबर को जालंधर स्थित जोनल कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले ईडी ने अनुराग वर्मा को 31 अगस्त को जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए कहा था। हालांकि, वह उस दिन ईडी के सामने पेश नहीं हो सके थे। उन्होंने जांच एजेंसी से समय बढ़ाने की मांग करते हुए अनुरोध किया था कि मांगे गए जरूरी दस्तावेज और रिकार्ड इकट्ठा करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। उनकी इस मांग के बाद अब ईडी ने उन्हें 7 सितंबर के लिए नई तारीख दी है। यह मामला मोहाली स्थित ‘सनटेक सिटी’ और ‘एल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में हुई कथित अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। ईडी द्वारा लगभग 348 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। अनुराग वर्मा वर्तमान में राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर तैनात हैं, लेकिन जिस समय ये कथित गड़बड़ियां हुई थीं, उस समय वह मकान निर्माण और शहरी विकास विभाग के प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे थे।

जांच के दायरे में अधिकारियों की भूमिका
जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि निजी बिल्डरों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जमीन के उपयोग में बदलाव की मंजूरी कैसे दी गई। प्रोजेक्ट्स के स्वीकृत लेआउट में गैर-कानूनी बदलाव करने की अनुमति देते समय किन सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया। क्या नियमों को दरकिनार करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाया गया और इस प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों की क्या भूमिका थी।

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