Satyabrata Kumar VRS : नीरव मोदी-माल्या केस के जांचकर्ता ED अफसर ने लिया VRS, वजह बनी चर्चा

Satyabrata Kumar ED VRS News: देश के सबसे चर्चित भगोड़ों नीरव मोदी और विजय माल्या के खिलाफ भारत का पक्ष मजबूत करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सीनियर आईआरएस अधिकारी सत्यब्रत कुमार ने अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। इस कड़क जांच अधिकारी के अचानक पद छोड़ने की असली वजह क्या है, जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी।

Satyabrata Kumar VRS

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 1, 2026

Satyabrata Kumar VRS : देश के कई सबसे बड़े और हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच का नेतृत्व करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व विशेष निदेशक सत्यब्रत कुमार ने आखिरकार सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। सत्यब्रत कुमार ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी में लगभग 12 वर्षों तक अपनी महत्वपूर्ण और सराहनीय सेवाएं दीं। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पूरी तरह से अपने व्यक्तिगत और निजी कारणों का हवाला देते हुए इस प्रतिष्ठित सरकारी सेवा को समय से पहले छोड़ने का एक बड़ा फैसला किया है। उनके इस अचानक लिए गए फैसले से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि वे एजेंसी के सबसे अनुभवी और तेज-तर्रार अधिकारियों में गिने जाते थे।

केंद्र सरकार से वीआरएस को मिली आधिकारिक मंजूरी

प्रशासनिक सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इसी साल अप्रैल के महीने में केंद्र सरकार ने सत्यब्रत कुमार के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन को औपचारिक रूप से अपनी मंजूरी दे दी थी। सरकार द्वारा इस संबंध में अंतिम और औपचारिक आदेश इसी चालू महीने की शुरुआत में आधिकारिक तौर पर जारी किए गए हैं। सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर (Customs and Indirect Taxes) कैडर के 2004 बैच के बेहद प्रतिष्ठित भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के इस वरिष्ठ अधिकारी को ठीक एक साल पहले ही ईडी से उनके मूल कैडर में वापस भेजा गया था। ईडी से वापसी के बाद, उन्हें पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में आयुक्त (अपील) के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया था, जहां वे अपनी सेवाएं दे रहे थे।

निर्धारित समय से 11 वर्ष पहले ही लिया संन्यास

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में मात्र 48 वर्ष के हो चुके सत्यब्रत कुमार को केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल में वीआरएस की अनुमति मिलने के बाद अब वे सेवामुक्त हो गए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, कुमार की नियमित सेवानिवृत्ति का वर्ष 2037 निर्धारित था। इसका सीधा मतलब यह है कि उन्होंने अपनी राजकीय सेवा के बचे हुए बहुमूल्य 11 वर्ष पहले ही स्वेच्छा से पद छोड़ने और वीआरएस लेने का एक अत्यंत चौंकाने वाला और बड़ा फैसला किया। इतनी कम उम्र में और सेवाकाल के शीर्ष पर रहते हुए वीआरएस लेने के उनके इस कदम ने प्रशासनिक हलकों में हर किसी को हैरान कर दिया है।

कई चर्चित और संवेदनशील घोटालों का किया पर्दाफाश

सत्यब्रत कुमार ने अपने लंबे कार्यकाल के दौरान ईडी के मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय (Western Regional Office) के प्रमुख के रूप में कई अत्यंत चर्चित, जटिल और देश को हिला देने वाली जांचों का बेहद सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके कुशल मार्गदर्शन में ही प्रसिद्ध हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ कथित दो अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 14,000 करोड़ रुपये से अधिक) के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले की मुख्य जांच आगे बढ़ी थी। इसके साथ ही, बैंकों का हजारों करोड़ रुपया लेकर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले और महाराष्ट्र के कई दिग्गज राजनेताओं से जुड़े बेहद संवेदनशील मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की कमान भी उन्हीं के हाथों में थी।

विदेशों में छिपाई गई काली कमाई को कराया जब्त

पीएनबी महाघोटाले और बैंक धोखाधड़ी के मामलों में देश के बाहर यानी विदेशी धरती पर छिपाई गई करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को कुर्क और जब्त कराने में सत्यब्रत कुमार ने बेहद अहम और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। इन संपत्तियों को कानूनी तौर पर अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) माना गया था, जिसे वापस लाना देश के लिए बड़ी कामयाबी थी। इसके अलावा, कुमार के मजबूत नेतृत्व में ही ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय ने बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप (Mahadev Betting App) घोटाले की परतों को खोला था। इस जांच के तहत छत्तीसगढ़ राज्य के कई बड़े और रसूखदार राजनेताओं, वरिष्ठ नौकरशाहों और नामी कारोबारियों के इस काले साम्राज्य से जुड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ था।

एक साल के भीतर दो दिग्गज आईआरएस अधिकारियों का इस्तीफा

भारतीय प्रशासनिक इतिहास में एक साल से भी कम समय के भीतर यह दूसरी बार है, जब किसी कड़क और बड़े अधिकारी ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से हटने के तुरंत बाद सरकारी सेवा से हमेशा के लिए इस्तीफा दे दिया हो। इससे ठीक पहले, जुलाई 2025 में एक और तेज-तर्रार अधिकारी कपिल राज ने अपनी निर्धारित सेवानिवृत्ति से पूरे 15 साल पहले ही सेवा से अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। साल 2009 बैच के बेहद काबिल आईआरएस अधिकारी कपिल राज ने भी ईडी में लगभग आठ वर्षों तक अपनी शानदार सेवाएं दी थीं। कपिल राज ने दिल्ली में जीएसटी खुफिया विभाग (DGGI) में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर नियुक्त होने के तुरंत बाद सरकारी सेवा को अलविदा कह दिया था, जिसके बाद अब सत्यब्रत कुमार का यह फैसला सामने आया है।