
SIR Voter List 2026 : विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान के बीच चुनाव आयोग ने सात राज्यों के उन मतदाताओं को एक और अवसर देने का फैसला किया है, जिनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट यानी ASDD श्रेणी में दर्ज किए गए थे। इन मतदाताओं को गणना फॉर्म यानी एन्यूमरेशन फॉर्म जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के दौरान उनके फॉर्म वापस नहीं मिले। इसके कारण संबंधित मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो गए थे। अब आयोग ने ऐसे लोगों को दोबारा मौका देने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली समेत इन सात राज्यों में लागू होंगे निर्देश
चुनाव आयोग का यह फैसला दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड के लिए लागू होगा। इन राज्यों में SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं को ASDD श्रेणी में चिह्नित किया गया था और जिनके गणना फॉर्म वापस नहीं मिले, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक और अवसर दिया जाएगा।
इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल गणना फॉर्म वापस नहीं मिलने के कारण कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। आयोग चाहता है कि वास्तविक मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का उचित अवसर मिले।
ASDD श्रेणी में कौन-कौन से मतदाता शामिल हैं?
ASDD का मतलब अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं से है। SIR अभियान के दौरान मतदाता सूची की जांच और सत्यापन के तहत ऐसे नामों की पहचान की जाती है, जिनके बारे में उपलब्ध जानकारी में इन चार स्थितियों में से किसी एक का संकेत मिलता है।
अनुपस्थित श्रेणी में ऐसे मतदाता हो सकते हैं, जो संबंधित पते पर नहीं मिले। स्थानांतरित श्रेणी में वे लोग आते हैं, जो अपना निवास बदल चुके हैं। मृत श्रेणी में उन मतदाताओं के नाम शामिल होते हैं, जिनकी मृत्यु की जानकारी दर्ज है। वहीं, डुप्लिकेट श्रेणी में एक से अधिक स्थानों पर दर्ज संभावित दोहराव वाले नाम शामिल किए जाते हैं।
हालांकि, किसी मतदाता का ASDD श्रेणी में चिह्नित होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह मतदान के लिए अपात्र है। इसी वजह से सत्यापन और दोबारा अवसर देने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गणना फॉर्म वापस नहीं मिलने से क्यों कटे नाम?
SIR अभियान के तहत मतदाताओं को गणना फॉर्म उपलब्ध कराए गए थे। इन फॉर्म के माध्यम से मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जाना था। लेकिन जिन लोगों के फॉर्म वापस नहीं मिले, उनके नामों को ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया।
इस स्थिति में कुछ पात्र मतदाताओं के सामने भी सूची में नाम शामिल कराने की चुनौती खड़ी हो सकती है। चुनाव आयोग के नए निर्देश ऐसे मतदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं। अब संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित लोगों तक दोबारा अवसर पहुंच सके।
पात्र मतदाताओं के लिए बनेगा निगरानी तंत्र
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को एक विशेष निगरानी तंत्र तैयार करने के लिए भी कहा है। इस व्यवस्था का मकसद यह देखना होगा कि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के अवसर से वंचित न रह जाए।साथ ही, आयोग ने डुप्लिकेट पंजीकरण रोकने पर भी जोर दिया है। यानी एक ओर वास्तविक मतदाताओं को सूची में शामिल करने का प्रयास होगा, वहीं दूसरी ओर एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होने जैसी गड़बड़ियों को रोकना भी जरूरी होगा।
अंतिम मतदाता सूची से पहले अहम कदम
SIR अभियान के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं होने पर संबंधित नागरिकों के लिए आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। चुनाव आयोग का यह फैसला सात राज्यों में ऐसे मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक और अवसर देने की दिशा में अहम कदम है।अब निगरानी तंत्र और अधिकारियों की कार्रवाई से यह तय होगा कि पात्र मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल होने का अवसर किस तरह मिलता है। मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के साथ किसी योग्य नागरिक का नाम छूटने से बचाना इस पूरी प्रक्रिया की प्रमुख चुनौती रहेगी।
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