E20 Petrol के इस्तेमाल पर कांग्रेस और सरकार आमने-सामने, पुरानी गाड़ियों के खराब होने का मंडराया खतरा

देश में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गाड़ियों के माइलेज और इंजन को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि कड़े परीक्षण के बाद ही इसे लागू किया गया है और कोई बड़ा नुकसान सामने नहीं आया है।

E20 Petrol

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 3, 2026

E20 Petrol: देश में ई20 पेट्रोल (एथनॉल मिश्रित ईंधन) के इस्तेमाल को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में भारी बहस और घमासान छिड़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि इस नए ईंधन के उपयोग को लेकर देश के आम वाहन चालकों और उपभोक्ताओं के मन में कई तरह के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी का कहना है कि देशभर के कई वाहन चालक और स्थानीय मैकेनिक लगातार गाड़ियों के इंजन के परफॉर्मेंस और माइलेज में गिरावट जैसी परेशानियों की शिकायत कर रहे हैं। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और जनता के सामने स्पष्ट आंकड़े रखे जाएं।

जयराम रमेश द्वारा ई20 पेट्रोल के तकनीकी प्रभावों पर उठाए गए तीखे मुद्दे

कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मुद्दे को उठाते हुए वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कहा कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद से गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ रहा है। कई वाहन मालिकों का दावा है कि इस ईंधन से गाड़ियों का माइलेज काफी कम हो गया है। इसके अलावा, इंजन की ताकत में कमी आने, विशेषकर पुराने और 2023 से पहले बने वाहनों में तकनीकी दिक्कतें पैदा होने, फ्यूल इंजेक्टर जाम होने, फ्यूल लाइनों में जंग लगने तथा रबर के पुर्जों (सील्स व हॉसेस) में जल्दी दरारें आने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इन जमीनी सच्चाइयों और स्वतंत्र सर्वे रिपोर्ट्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का स्पष्टीकरण

दूसरी ओर, सरकार की तरफ से इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में अपनी प्रतिक्रिया दी है। मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ई20 पेट्रोल (जिसमें 20 प्रतिशत एथनॉल और शेष पेट्रोल होता है) को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि कई वर्षों तक कड़े वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी जांच-परख के बाद ही देश में लागू किया गया है। उनके अनुसार, सरकार के पास अभी तक ऐसा कोई भी बड़ा या पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण देश में बड़ी संख्या में वाहनों को कोई बड़ा या स्थायी नुकसान पहुंचा है।

स्वतंत्र सर्वे और रिपोर्टों का हवाला देकर सरकार से पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस ने अपने दावों के समर्थन में कुछ स्वतंत्र सर्वे और रिपोर्टों का भी विशेष रूप से जिक्र किया है, जिसमें वाहन मालिकों ने ई20 ईंधन के उपयोग के बाद अपने वाहनों में आए बदलावों और घटती ईंधन दक्षता (माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की कमी) की बात कही है। कांग्रेस का तर्क है कि जब तक सरकार सभी तकनीकी रिपोर्टों और फैक्ट्स को जनता के सामने नहीं रखती, तब तक वाहन चालकों की आशंकाओं को दूर नहीं किया जा सकता। बहरहाल, ई20 पेट्रोल के बढ़ते उपयोग और वाहन सुरक्षा को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकती है।