E20 Janata Party: ‘E20 जनता पार्टी’ का उदय और पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के खिलाफ नया मोर्चा, सोशल मीडिया पर गरमाई सियासत

नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब देश में 'E20 जनता पार्टी' का नया संगठन चर्चा में आ गया है। पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति के खिलाफ उठे इस विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी समर्थन दे दिया है। 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया गया है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है।

E20 Janata Party

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 27, 2026

E20 Janata Party: नीट पेपर लीक के खिलाफ हाल ही में चले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के चर्चित आंदोलन के बाद अब देश की राजनीतिक और सोशल मीडिया पर एक नए संगठन ‘E20 जनता पार्टी’ की गूंज सुनाई देने लगी है। यह नया संगठन पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की सरकारी नीति (E20 Policy) के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है। इस वर्चुअल और उपभोक्ता-अधिकार मंच ने सरकार के सामने यह बड़ी मांग रखी है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर एथनॉल-युक्त ईंधन के साथ-साथ 100% शुद्ध पेट्रोल (बिना एथनॉल वाला विकल्प) भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की पूरी आजादी मिल सके।

टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियनों का मिला भारी समर्थन

E20 पेट्रोल के इस विरोध को अब देश के व्यावसायिक वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टर्स का भी मजबूत समर्थन मिलने लगा है। ‘दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन’ ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए आगामी 4 अगस्त को दिल्ली में संसद मार्च निकालने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का मुख्य आरोप है कि पेट्रोल में एथनॉल की मात्रा बढ़ाने से गाड़ियों का माइलेज काफी कम हो गया है, सर्विसिंग और मेंटेनेंस का खर्च बेतहाशा बढ़ गया है, और खासकर पुरानी गाड़ियों के इंजन की परफॉर्मेंस तथा पुर्जों पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

‘E20 जनता पार्टी’ की प्रमुख मांगें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बेहद कम समय में हजारों फॉलोअर्स जुटाने वाले इस संगठन ने खुद को एक उपभोक्ता अधिकार अभियान (Consumer Right Campaigning) के रूप में पेश किया है। संगठन का कहना है कि वे किसी प्रकार की वित्तीय सब्सिडी या पूरी तरह से एथनॉल नीति को बंद करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी मूल मांग यह है कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की साफ और पारदर्शी लेबलिंग हो। इसके साथ ही सरकार से मांग की गई है कि एथनॉल मिश्रण से पर्यावरण, वाहनों के माइलेज, प्रदूषण और इंजन पर पड़ने वाले असर से जुड़े तमाम वैज्ञानिक आंकड़े और डेटा सार्वजनिक किए जाएं तथा इस पर एक स्वतंत्र जांच बैठाई जाए।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने खारिज किए नुकसान के दावे

देश में बिना एथनॉल वाले शुद्ध और प्रीमियम (100 ऑक्टेन) पेट्रोल की बात करें तो यह पहले से कुछ चुनिंदा स्थानों पर उपलब्ध है, लेकिन इसकी कीमत लगभग 169 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य E20 पेट्रोल करीब 102 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। ऐसे में आम जनता के लिए शुद्ध पेट्रोल खरीदना काफी महंगा साबित हो रहा है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष रखते हुए पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी पहले ही संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार को एथनॉल-युक्त पेट्रोल से वाहनों के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ने को लेकर कोई भी आधिकारिक या व्यापक शिकायतें नहीं मिली हैं, जिससे यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।