
India Iran Relations : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई से फोन पर बातचीत की। ईरान के भारत स्थित दूतावास ने 12 अक्टूबर को इस संवाद की जानकारी दी। दूतावास के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ भारत और ईरान के आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। हालांकि, बातचीत के सभी विषयों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ईरानी दूतावास ने क्या जानकारी दी?
ईरानी दूतावास के मुताबिक, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से फोन पर चर्चा की। इस बातचीत में हाल के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम तथा दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषय शामिल थे। आधिकारिक बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य या जहाजों पर हुए हमलों को बातचीत का विशिष्ट मुद्दा नहीं बताया गया। इसलिए चर्चा के सटीक एजेंडे को लेकर फिलहाल सावधानी बरतना जरूरी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों से चिंता
यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के आसपास समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। 11 अक्टूबर को भारतीय चालक दल वाले दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की खबर सामने आई थी। इनमें निकारागुआ के झंडे वाला जहाज एमटी पेट्रो डॉल्फिन भी शामिल था। जहाज पर 11 भारतीय नाविक सवार थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद नौ नाविकों को बचा लिया गया, जबकि दो भारतीय नाविक लापता बताए गए।
दूसरे जहाज एमटी वल्थेरा पर भी हमला
इसी दौरान मार्शल द्वीपसमूह के झंडे वाले वाणिज्यिक जहाज एमटी वल्थेरा पर भी अज्ञात प्रक्षेप्य से हमला हुआ और जहाज में आग लगने की खबर आई। जहाज पर 11 भारतीय नाविक मौजूद थे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, सभी नाविक सुरक्षित थे। इन घटनाओं के बाद भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा की और समुद्र में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया।

भारत की चिंता और कूटनीतिक संपर्क
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां अस्थिरता का असर तेल और गैस की आवाजाही के साथ समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है। भारत ने पश्चिम एशिया के संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए निकालने पर जोर दिया है। डोभाल और रेजाई की बातचीत ऐसे माहौल में हुई है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर कई देशों की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। हालांकि, इस फोन कॉल में जहाजों पर हुए हमलों पर चर्चा हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारत-ईरान संपर्क का कूटनीतिक महत्व
यह बातचीत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की भारत यात्रा के लगभग एक महीने बाद हुई। पेजेशकियान पिछले महीने ब्रिक्स सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच संपर्क को क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हितों पर संवाद के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के विशिष्ट नतीजों या किसी नए समझौते की घोषणा नहीं की गई है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी रहेगी।
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