डोनाल्ड ट्रंप की ताकत बढ़ी! सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने दिए व्यापक अधिकार

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ताकत दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मानें तो अब वह किसी भी एजेंसी चीफ को कभी भी बटा सकते हैं. जी हां, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा काफी बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्वतंत्र फेडरल एजेंसियो के प्रमुखों को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में  कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं. हालांकि, इस फैसले में फेडरल रिजर्व

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Published On :

जून 30, 2026

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वाशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी ताकत दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मानें तो अब वह किसी भी एजेंसी चीफ को कभी भी बटा सकते हैं. जी हां, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा काफी बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्वतंत्र फेडरल एजेंसियो के प्रमुखों को हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में  कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को अपनी इच्छा से पद से हटा सकते हैं. हालांकि, इस फैसले में फेडरल रिजर्व यानी अमेरिकी केंद्रीय बैंक को इससे अलग रखा गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या अपवाद रखा?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जजों अपने फैसले में यह भी कहा कि फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक (Lisa Cook) फिलहाल अपने पद पर बनी रहेंगी. वह ट्रंप प्रशासन की ओर से उन्हें हटाने की कोशिश के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं. हालांकि, कुक ने इन आरोपों से इनकार किया है। 

अब ट्रंप को वजह बताने की जरूरत नहीं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, फेडरल रिजर्व को छोड़कर बाकी स्वतंत्र एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने के लिए अब राष्ट्रपति को किसी खास वजह अथवा कारण की जरूरत नहीं होगी. इससे पहले संघीय कानूनों के तहत ऐसे अधिकारियों को हटाने के लिए ठोस कारण बताना जरूरी था. यानी देश के सेंट्रल बैंक को छोड़कर कोर्ट ने माना कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से एजंसियों के प्रमुखों को हटा सकते हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 91 साल पुराना फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 91 साल पुराने अपने ही ऐतिहासिक फैसले Humphrey’s Executor v. United States को भी पलट दिया. उस फैसले में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए गए थे ताकि स्वतंत्र एजेंसियां राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर काम कर सकें. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कोर्ट के 6 कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से आया, जिसे ट्रंप प्रशासन की शक्तियों में बड़ी बढ़ोतरी के तौर पर देखा जा रहा है. इस बेंच में 9 जज शामिल थे। 

चीफ जस्टिस ने क्या कहा
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति को अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली व्यवस्था संविधान में तय शक्तियों के बंटवारे के खिलाफ है. जजों ने फेडरल ट्रेड कमीशन की पूर्व सदस्य रेबेका स्लॉटर के मामले में फैसला सुनाया, जिन्हें ट्रंप ने बिना किसी कारण के निकाल दिया था, जबकि फेडरल कानून के एक नियम के अनुसार कारण बताना जरूरी है। 

इस फैसले का लॉजिक दूसरी एजेंसियों पर भी लागू होता है, जिनमें नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन शामिल हैं, जहां ट्रंप ने बोर्ड के सदस्यों को भी निकाल दिया है. इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप काफी खुश हैं। 

डोनाल्ड ट्रंप हुए खुश
डोनाल्ड ट्रंप ने एक ट्रुथ सोशल पोस्ट में इस फैसले पर अपनी खुशी और सहमति जताई. उन्होंने लिखा, ‘यह बहुत सम्मान की बात है कि मौजूदा प्रेसिडेंट होने के नाते यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला मिला, जो प्रेसिडेंशियल शक्तियों के संबंध में अब तक दिए गए सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है। 

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