Donald Trump Big Decisions: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो बड़े और चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। पहला, उन्होंने अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को पद से हटा दिया। दूसरा, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के जरिए अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को जबरन रिटायरमेंट लेने का आदेश दिया गया। इन दोनों निर्णयों ने अमेरिकी राजनीति और सैन्य गलियारों में हलचल मचा दी है।
ट्रंप का धमकी भरा कदम: फार्मा सेक्टर पर 100% टैरिफ, भारत पर भी पड़ सकता है असर
अटॉर्नी जनरल को हटाने की वजह
पाम बोंडी को हटाने का कारण जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलें बताई जा रही हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का आरोप है कि बोंडी ने इन फाइलों की जांच सही तरीके से नहीं की और विरोधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में देरी की। एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों को जारी करने में भी गड़बड़ी हुई, जिससे ट्रंप को राजनीतिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
कभी ट्रंप की करीबी समर्थक रही बोंडी पर आरोप है कि उन्होंने सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े दस्तावेजों को छिपाने की कोशिश की। इस वजह से ट्रंप पर फाइलें गायब करने के आरोप लगे और उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।
सेना प्रमुख को जबरन रिटायर करने का आदेश
दूसरा बड़ा फैसला अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को लेकर है। ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच उन्हें पद छोड़ने और तुरंत रिटायरमेंट लेने का आदेश दिया गया है। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने उनसे इस्तीफा मांगा है।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि सेना की कमान ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जो उनके विजन और नीतियों को पूरी तरह लागू कर सके। जनरल जॉर्ज और ट्रंप सरकार के बीच ईरान युद्ध को लेकर मतभेद थे। चर्चा है कि जॉर्ज सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में असफल रहे और ट्रंप की रणनीति के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे।
राजनीतिक और सैन्य असर
इन दोनों फैसलों ने अमेरिकी राजनीति और सेना में अस्थिरता पैदा कर दी है। अटॉर्नी जनरल को हटाने से कानूनी और राजनीतिक विवाद गहराएंगे, वहीं सेना प्रमुख को जबरन रिटायर करने से सैन्य नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप का उद्देश्य स्पष्ट है—वे चाहते हैं कि प्रशासन और सेना उनके विजन के अनुसार काम करे।
जंग के बीच लिए गए ये दो बड़े फैसले ट्रंप की आक्रामक शैली और नियंत्रण की इच्छा को दर्शाते हैं। अटॉर्नी जनरल और सेना प्रमुख को हटाने से यह संदेश गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी तरह से अपने एजेंडे को लागू करना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कठोर कदम ही क्यों न उठाने पड़ें।










