Donald Trump On Iran: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मियामी में आयोजित ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट’ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अब जीवित नहीं हैं। ट्रंप के अनुसार, हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों ने न केवल ईरान के रक्षा तंत्र को ध्वस्त किया है, बल्कि उसके शीर्ष नेतृत्व को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है।
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मोजतबा खामेनेई की मौत और नेतृत्व का संकट
गौरतलब है कि 28 फरवरी, 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था। हालांकि, नियुक्ति के बाद से ही वे सार्वजनिक पटल से गायब हैं।
ट्रंप ने समिट में कहा,”अमेरिकी सैन्य हमलों ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को तहस-नहस कर दिया है। मोजतबा खामेनेई की मौत हो चुकी है और अब ईरान पूरी तरह नेतृत्व विहीन है।” इससे पहले 16 मार्च को भी ट्रंप ने संदेह जताया था कि मोजतबा का लंबे समय तक दिखाई न देना असामान्य है। अब उन्होंने पुख्ता तौर पर उनकी मौत का दावा किया है।
“ईरान की सैन्य शक्ति अब खाड़ी की तलहटी में”
राष्ट्रपति ट्रंप ने मियामी में अमेरिकी सैन्य कौशल का बखान करते हुए ईरान की सैन्य बर्बादी का खाका खींचा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं अब शून्य के बराबर हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना अब अस्तित्व में नहीं है और वह खाड़ी की तलहटी में डूब चुकी है। वहीं, उनकी वायुसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। ईरान की विमानरोधी (Anti-aircraft) प्रणाली और संचार क्षमताएं पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी हैं।
अमेरिका लगातार ईरान के मिसाइल और ड्रोन कारखानों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने कहा, “हम उनके रक्षा औद्योगिक आधार को उस स्तर पर तबाह कर रहे हैं जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।”
अनिश्चितता के भंवर में ईरान
अगर ट्रंप का यह दावा सच साबित होता है, तो ईरान एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक संकट में फंस सकता है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा ही सत्ता की इकलौती कड़ी माने जा रहे थे।
फिलहाल ईरान की ओर से ट्रंप के इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे रहस्य और गहरा गया है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व के गायब होने से लेबनान (हिजबुल्लाह) और यमन (हुती) जैसे उसके सहयोगी संगठनों पर भी गहरा असर पड़ सकता है।
क्या यह मनोवैज्ञानिक युद्ध है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। हालांकि, जिस तरह से ट्रंप ने विस्तार से सैन्य तबाही का विवरण दिया है, उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौकन्ना कर दिया है। क्या वाकई मोजतबा खामेनेई की मौत हो चुकी है या वे किसी सुरक्षित बंकर से रणनीति बना रहे हैं, यह आने वाले कुछ दिन साफ कर देंगे।
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