Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप का NATO पर बड़ा बयान,’अमेरिका के बिना शून्य है यह सैन्य संगठन’

क्या दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन 'NATO' सच में अमेरिका की बैसाखियों पर टिका है? डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। ट्रंप ने इसे 'शून्य' करार देते हुए यूरोपीय देशों की सुरक्षा पर जो सवाल उठाए हैं, उससे युद्ध की आहट के बीच पश्चिमी देशों की नींद उड़ गई है। जानिए ट्रंप का पूरा सच!

Donald Trump

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 8, 2026

Donald Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए नाटो (NATO) और यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग्रीनलैंड और रक्षा बजट को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है।

अमेरिका की शक्ति और नाटो की प्रासंगिकता

ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका के बिना नाटो की कोई हैसियत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देश केवल अमेरिका के सैन्य दबदबे और उसकी उपस्थिति से डरते हैं। ट्रंप के अनुसार, अगर इस गठबंधन से अमेरिका को हटा दिया जाए, तो नाटो अपनी पूरी ताकत खो देगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्तर पर जो स्थिरता आज दिखाई दे रही है, वह केवल अमेरिका के मजबूत नेतृत्व के कारण है। उनके अनुसार, दुनिया के दुश्मन केवल उसी अमेरिका का सम्मान करते हैं जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ‘फिर से महान’ बनाया था।

यूरोपीय देशों पर आर्थिक बोझ डालने का आरोप

ट्रंप ने यूरोपीय देशों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनके राष्ट्रपति बनने से पहले नाटो के अधिकांश सदस्य देश अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई देश अपनी जीडीपी का मात्र 2 प्रतिशत भी रक्षा पर खर्च नहीं कर रहे थे और अमेरिका को ‘बेवकूफों’ की तरह उनका बोझ उठाना पड़ रहा था। ट्रंप ने दावा किया कि उनके द्वारा दिए गए दबाव के कारण ही नाटो देशों ने अपना रक्षा बजट बढ़ाया और इसे 5 प्रतिशत तक ले गए, जिसे पहले असंभव माना जाता था। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका अब दूसरों की सुरक्षा के लिए अकेले आर्थिक बोझ नहीं उठाएगा।

यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सुरक्षा में भूमिका

यूक्रेन संकट का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका का सक्रिय हस्तक्षेप नहीं होता, तो रूस अब तक पूरे यूक्रेन पर अपना कब्जा जमा चुका होता। उन्होंने अपनी विदेश नीति को श्रेय देते हुए कहा कि उनकी रणनीतियों ने न केवल युद्ध को सीमित किया, बल्कि रूस जैसे देशों को एक सीमा से आगे बढ़ने से रोका। ट्रंप का मानना है कि नाटो की असली ताकत उसकी एकता में नहीं, बल्कि उसमें अमेरिका की मौजूदगी में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की भागीदारी ही रूस और चीन को आक्रामक कदम उठाने से रोकती है।

नोबेल शांति पुरस्कार और आठ युद्धों को रोकने का दावा

अपने पोस्ट में ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रयासों से आठ युद्धों को रुकवाया और लाखों लोगों की जान बचाई। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की कि इतने बड़े मानवीय कार्य के बावजूद उन्हें ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से नवाजा नहीं गया। उन्होंने विशेष रूप से नॉर्वे का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण लोगों की जान बचाना है। इसके साथ ही उन्होंने यह संदेह भी जताया कि यदि भविष्य में अमेरिका पर कोई संकट आता है, तो क्या नाटो के अन्य सदस्य देश उसकी मदद के लिए वास्तव में आगे आएंगे?

ग्रीनलैंड विवाद और नाटो में संभावित फूट

ट्रंप का यह विस्फोटक बयान डेनमार्क की प्रधानमंत्री द्वारा दी गई उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर नाटो के टूटने की आशंका जताई थी। ट्रंप ने हालांकि यह आश्वासन दिया कि अमेरिका हमेशा नाटो के साथ खड़ा रहेगा, चाहे बाकी सदस्य देश अपना कर्तव्य निभाएं या नहीं। लेकिन उनके इस बयान ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों और यूरोपीय नेताओं के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या भविष्य में नाटो अपनी प्रासंगिकता बनाए रख पाएगा।

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