Crude Oil Surge : ईरान युद्ध से कच्चे तेल में 51 फीसदी उछाल, भारत पर बढ़ा आर्थिक दबाव संकट

अमेरिकी राजनीति के सबसे चर्चित नेता डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक ऐसा रहस्यमयी और बेहद आक्रामक संदेश पोस्ट किया है जिसने न सिर्फ सुपरपावर देशों को हैरान कर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़े होने का खौफ पैदा कर दिया है; जानिए इस पोस्ट की असली इनसाइड स्टोरी।

Crude Oil Surge

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 17, 2026

Crude Oil Surge : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 51 फीसदी से ज्यादा का जबरदस्त इजाफा दर्ज किया जा चुका है। इस भारी तेजी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार बनी हुई हैं। वैश्विक बाजार की यह हलचल और कच्चे तेल का यह उच्च स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद चिंताजनक विषय और सबसे बड़ी मुसीबत बनकर उभरा है।

डॉलर के सामने पस्त हुआ रुपया, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोतरफा संकट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारत इस समय दोतरफा आर्थिक मार झेलने को मजबूर है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से काफी ऊपर निकल चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। रुपए की इस ऐतिहासिक गिरावट ने देश की आयात लागत को काफी बढ़ा दिया है। इस दोहरे संकट का सीधा और बेहद नकारात्मक असर देश की घरेलू इकोनॉमी, राजकोषीय घाटे और सरकारी खजाने पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।

घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, आम जनता की जेब पर बढ़ा बोझ

देश के आर्थिक खजाने और तेल आयात पर बढ़ते दबाव को देखते हुए हाल ही में घरेलू सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने एक बड़ा कदम उठाया था। तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर का सीधा इजाफा किया गया था। इस बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है। वहीं, बाजार के आर्थिक जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां ऐसी ही रहीं, तो आने वाले दिनों में आम जनता को फ्यूल के दामों में और भी अधिक बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।

लगातार दूसरे दिन स्थिर रहीं कीमतें, देश के महानगरों में ईंधन के मौजूदा भाव

राहत की बात यह है कि पिछले दो दिनों से ईंधन की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली समेत तमाम प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। इसका मतलब है कि 15 मई को हुए आखिरी इजाफे के बाद जो दरें तय हुई थीं, वही आज भी लागू हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर की कीमत पर बिक रहा है।

मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम

अगर देश के अन्य प्रमुख महानगरों की बात करें, तो वहां भी कीमतें काफी उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। कोलकाता में आज पेट्रोल के दाम 108.74 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.13 रुपए प्रति लीटर दर्ज की गई है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल का भाव 106.68 रुपए और डीजल 93.14 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है। इसके अलावा, दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 103.67 रुपए और डीजल के दाम 95.25 रुपए प्रति लीटर बने हुए हैं।

महानगरों में पेट्रोल और डीजल के भाव (रुपए प्रति लीटर):
+-----------+------------+------------+
| महानगर    | पेट्रोल    | डीजल       |
+-----------+------------+------------+
| दिल्ली    | 97.77      | 90.67      |
| मुंबई     | 106.68     | 93.14      |
| कोलकाता   | 108.74     | 95.13      |
| चेन्नई    | 103.67     | 95.25      |
+-----------+------------+------------+

ईरान युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई में रिकॉर्ड तेजी

कच्चे तेल के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस युद्ध के दौरान क्रूड के दामों में 50 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई है। बीते 27 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाड़ी देशों का कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) महज 72.48 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तब से अब तक इसमें 51 फीसदी की भारी तेजी आ चुकी है और यह बढ़कर 109.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं, अमेरिकी क्रूड यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) के दाम भी 27 फरवरी के 67.02 डॉलर प्रति बैरल से 57 फीसदी उछलकर वर्तमान में 105.42 डॉलर प्रति बैरल पर आ चुके हैं।

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 5 फीसदी से ज्यादा टूटा, रिकॉर्ड निचले स्तर पर

कच्चे तेल की इस मार के बीच भारतीय करेंसी बाजार से भी परेशान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। ईरान संकट के इस पूरे दौर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में 5 फीसदी से भी अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। बीते 27 फरवरी को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया प्रति डॉलर 91.08 के स्तर पर देखा गया था, जिसमें अब तक 5.19 फीसदी की बड़ी कमजोरी आ चुकी है। 15 मई के कारोबारी सत्र की समाप्ति पर रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 95.81 रुपए के स्तर पर बंद हुआ है।

कारोबारी हफ्ते में रुपए को भारी नुकसान, आयातकों की बढ़ी मुश्किलें

मुद्रा बाजार के इस उतार-चढ़ाव का सीधा मतलब यह है कि ईरान संकट के चलते भारतीय रुपए को डॉलर के मुकाबले अब तक कुल 4.73 रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अगर केवल हालिया कारोबारी हफ्ते के दिनों की ही बात की जाए, तो भारतीय रुपए को अकेले इस सप्ताह में ही 230 पैसे यानी 2.30 रुपए का बड़ा घाटा सहना पड़ा है। रुपए की इस कमजोरी ने न केवल कच्चे तेल बल्कि देश में आयात होने वाली हर वस्तु को महंगा कर दिया है, जिससे देश के सामने व्यापार घाटे की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।