Iran Nuclear Sites Destroyed : ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह तबाह, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ‘न्यूक्लियर डस्ट’ निकालना भी नामुमकिन

दुनिया के नक्शे से मिट जाएंगे ईरान के परमाणु ठिकाने? डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि ईरान के न्यूक्लियर सेंटर अब केवल मलबे का ढेर हैं। उन्होंने 'न्यूक्लियर डस्ट' का जिक्र कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। क्या यह ईरान की सबसे बड़ी हार है? जानिए विस्तार से।

Iran Nuclear Sites Destroyed

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

Iran Nuclear Sites Destroyed : वाशिंगटन से आ रही ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान सैन्य और परमाणु स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हालिया हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने इस कदर जमींदोज हो चुके हैं कि अब वे दोबारा सिर उठाने की स्थिति में नहीं हैं। फॉक्स न्यूज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि बमबारी के बाद उसके पास अपने ठिकानों से ‘न्यूक्लियर डस्ट’ यानी रेडियोएक्टिव सामग्री निकालने तक की तकनीकी क्षमता नहीं बची है। परमाणु सामग्री मलबे में इतनी गहराई में दब गई है कि उसे बाहर निकालना वर्तमान ईरानी संसाधनों के लिए असंभव हो गया है।

ईरान को परमाणु हथियार मुक्त रखने का अमेरिकी संकल्प

राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान अपनी पुरानी नीति को दोहराते हुए कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह तय नहीं है कि परमाणु कचरे को साफ करने या इन ठिकानों का निरीक्षण करने के लिए अमेरिकी सेना ईरान में दाखिल होगी या नहीं। ट्रंप ने कहा कि यह विषय भविष्य की कूटनीतिक बातचीत और संभावित समझौतों पर निर्भर करता है। अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह समाप्त करना है ताकि वैश्विक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

व्हाइट हाउस से चेतावनी: आर्मी जनरल अगले आदेश के इंतजार में

व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप का रुख बेहद आक्रामक नजर आया। उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के शीर्ष जनरलों का एक बड़ा समूह उनके अगले निर्देश का इंतजार कर रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के विरुद्ध सैन्य और रणनीतिक स्तर पर कई विकल्पों की सूची तैयार है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि यदि ईरान ने कूटनीतिक रास्तों पर अमेरिका की शर्तों को नहीं माना, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प हमेशा खुला रहेगा। यह बयान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को और अधिक हवा देने वाला माना जा रहा है।

ईरान के शांति प्रस्ताव पर ट्रंप का ‘विटो’: पूरी तरह अस्वीकार्य

ट्रंप का यह सख्त बयान ऐसे समय में आया है जब उन्होंने ईरान द्वारा भेजे गए युद्ध विराम और शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को मिले इस प्रस्ताव से उम्मीद जताई जा रही थी कि 28 फरवरी से जारी खूनी संघर्ष पर विराम लगेगा, लेकिन ट्रंप ने इसे ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया। ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने लिखा कि उन्हें ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने ईरान पर पिछले 50 वर्षों से अमेरिका के साथ ‘खेल खेलने’ का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उनके खुश रहने के दिन खत्म हो गए हैं।

28 फरवरी का हमला और मिडिल ईस्ट का बदलता परिदृश्य

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक भीषण संयुक्त सैन्य हमला किया था। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई सहित देश के कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए थे। इस घटना ने पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध की आग में झोंक दिया। जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया। हालांकि, 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन शांति की स्थायी कोशिशें अब तक विफल रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ भविष्य पूरी तरह अनिश्चित नजर आता है।