Dollar vs Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर, लेकिन सेंसेक्स में तेजी; निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है, लेकिन विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में कमी और डॉलर (Dollar) की हल्की कमजोरी ने रुपये को सहारा दिया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 25, 2026

Dollar vs Rupee: बुधवार, 25 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिली, लेकिन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता रहा। ईरान से जुड़ी वैश्विक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे टूटकर 93.96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जिससे यह 94 के स्तर के करीब आ गया।

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रुपये में गिरावट के कारण

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण रुपया कमजोर हुआ है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.94 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 18 पैसे कम है। मंगलवार को रुपया 23 पैसे टूटकर 93.76 पर बंद हुआ था। डॉलर के मुकाबले छह प्रमुख मुद्राओं के प्रदर्शन को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.15 प्रतिशत गिरकर 99.28 पर आ गया।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि केवल इस महीने में ही रुपये में करीब 4.5 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। निकट भविष्य में रुपया 93.65 से 94.25 के दायरे में रहने की संभावना है। उनका कहना है कि विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती रुपये पर लगातार दबाव डाल रही है।

शेयर बाजार में मजबूती

वहीं, घरेलू शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,161.61 अंक यानी 1.57 प्रतिशत बढ़कर 75,230.06 अंक पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी 372.85 अंक यानी 1.63 प्रतिशत चढ़कर 23,285.25 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 8,009.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, लेकिन बाजार में सकारात्मक शुरुआत बनी रही।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड का भाव 4.4 प्रतिशत गिरकर 99.89 डॉलर प्रति बैरल रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू शेयर बाजार की मजबूती ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।

रुपये की गिरावट का असर

रुपये में गिरावट का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आयातित वस्तुएं महंगी होने लगती हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ता है। साथ ही, जीडीपी वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है और आयात बिल बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रुपये में गिरावट जारी रहती है, तो यह आम लोगों की क्रय शक्ति पर असर डालेगी और मुद्रास्फीति को बढ़ावा देगी। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की मजबूती ऐसे समय में भारतीय मुद्रा को कमजोर बनाए रखती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।