Dollar Vs Rupee: RBI के कड़े एक्शन से संभला रुपया, डॉलर के मुकाबले 1.22 रुपये की जोरदार रिकवरी!

आरबीआई (RBI) द्वारा नेट डॉलर-रुपया ओपन पोजीशन पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बाद सोमवार (30 मार्च) को भारतीय रुपये में जोरदार रिकवरी देखने को मिली है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 30, 2026

Dollar Vs Rupee: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया कार्रवाई से रुपये में मजबूती देखने को मिली। सोमवार, 30 मार्च को रुपया तेज़ी से मज़बूत होकर खुला और शुक्रवार, 27 मार्च के 94.81 के बंद भाव के मुकाबले 1.22 पैसे बढ़कर 93.59 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। यह सुधार इसलिए हुआ क्योंकि बैंकों ने RBI के नए निर्देशों के तहत अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन को कम करना शुरू कर दिया।

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RBI का नया नियम

शुक्रवार देर रात RBI ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे हर कारोबारी दिन के अंत तक ऑनशोर मार्केट में अपनी नेट ओपन रुपया पोजीशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखें। यह नियम 10 अप्रैल तक लागू रहेगा। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में डॉलर की बिकवाली बढ़ाना और रुपये की हालिया गिरावट को रोकना है।

आर्बिट्रेज ट्रेड और दबाव

पिछले दिनों आर्बिट्रेज ट्रेडिंग के जरिए ऑनशोर डॉलर खरीदकर और उन्हें NDF (नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड) मार्केट में बेचकर बड़े पैमाने पर सौदे किए जा रहे थे। ईरान संघर्ष, तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अस्थिरता के कारण इन दोनों सेगमेंट के बीच स्प्रेड बढ़ गया था। अनुमान है कि ऐसी पोजीशन का आकार 25 से 50 बिलियन डॉलर तक हो सकता है।

रुपये की गिरावट का रिकॉर्ड

मार्च महीने में रुपये पर भारी दबाव रहा। यह 4% से अधिक गिर गया और सात साल में सबसे खराब मासिक प्रदर्शन दर्ज किया। शुक्रवार को करेंसी लगभग 1% गिरकर 94.8125 पर बंद हुई, जो 94.84 के ऑल-टाइम लो के करीब थी।

RBI की सक्रियता

रुपये को सपोर्ट करने और गिरावट की रफ्तार को धीमा करने के लिए RBI ऑनशोर और NDF दोनों मार्केट में सक्रिय रहा। बैंकों को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी, जिससे शुरुआती ट्रेडिंग में रुपये को मजबूती मिली।

ट्रेडर्स की राय

एक निजी बैंक के करेंसी ट्रेडर ने कहा कि डॉलर/रुपये में किसी भी शुरुआती गिरावट पर इंपोर्टर्स की तरफ से तेज़ी से खरीदारी देखने को मिलेगी, जबकि बैंक अपनी पोजीशन घटाते रहेंगे। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि यह प्रक्रिया कहां जाकर खत्म होगी।

संभावित नुकसान

ट्रेडर्स ने यह भी नोट किया कि बैंकों को बड़ा नुकसान हो सकता है क्योंकि वे अपनी पोजीशन को उस स्प्रेड से कहीं ज़्यादा बड़े स्प्रेड पर अनवाइंड कर रहे हैं जिस पर उन्होंने शुरुआत की थी।

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