Do Deewane Seher Mein Review: फिल्म दो दीवाने शहर में की कहानी दो ऐसे किरदारों पर आधारित है जो खुद को परफेक्ट नहीं मानते। शशांक (सिद्धांत चतुर्वेदी) ऐसा लड़का है जिसे प्रेजेंटेशन देने का नाम सुनते ही रिजाइन करने का मन हो जाता है। वहीं रोशनी (मृणाल ठाकुर) मोटा चश्मा पहनती है और जब कोई उससे कॉन्टेक्ट लेंस लगाने की बात करता है तो वह मजाकिया अंदाज में जवाब देती है— “तुमने ब्रेन इंप्लांट का नहीं सोचा?” दोनों की अपनी-अपनी कमियां हैं, लेकिन सवाल यही है कि क्या इन कमियों के बावजूद प्यार होगा और अगर होगा तो क्या ये दोनों अपने डर पर जीत पा पाएंगे।
फिल्म का अंदाज

यह फिल्म हल्की-फुल्की और बेहद रिलेटेबल है। असल जिंदगी की तरह इसमें किरदार पिक्चर-परफेक्ट नहीं हैं, बल्कि आम इंसानों की तरह अपनी कमजोरियों के साथ जीते हैं। यही वजह है कि दर्शक इनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। फिल्म में कोई बड़ा ट्विस्ट नहीं है, लेकिन छोटे-छोटे पल दिल जीत लेते हैं। गाने बीच-बीच में आते हैं और कहानी को सहजता से आगे बढ़ाते हैं।
अभिनय
सिद्धांत चतुर्वेदी ने शशांक के किरदार को पूरी तरह जी लिया है। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद डिलीवरी से साफ झलकता है कि किरदार में आत्मविश्वास की कमी है। मृणाल ठाकुर बेहद प्यारी और नैचुरल लगी हैं। उनका अंदाज दर्शकों को अपने आसपास की लड़कियों की याद दिलाता है। इला अरुण, संदीपा धर, आयशा रजा और जॉय सेनगुप्ता ने भी अपने-अपने किरदारों को खूबसूरती से निभाया है।
लेखन और निर्देशन

फिल्म की कहानी अभिरुचि चांद ने लिखी है और निर्देशन रवि उदयवार ने किया है। लेखन सरल और दिल को छू लेने वाला है। डायरेक्शन अच्छा है, हालांकि स्क्रीनप्ले थोड़ा और मजबूत होता तो फिल्म और प्रभावी बन सकती थी।
दो दीवाने शहर में एक ऐसी फिल्म है जो आपको हल्के-फुल्के अंदाज में गहरी बातें समझाती है। यह फिल्म न तो ओवरड्रामेटिक है और न ही फिल्मी अंदाज में बनाई गई है, बल्कि असल जिंदगी की तरह लगती है। सिद्धांत और मृणाल की केमिस्ट्री दिल जीत लेती है और दर्शकों को अपने साथ जोड़ लेती है। अगर आप एक प्यारी और रिलेटेबल लव स्टोरी देखना चाहते हैं तो यह फिल्म जरूर देखें।
रेटिंग: (3.5/5)
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