Delimitation Bill India : डीएमके का कांग्रेस से दूरी बनाने का फैसला, विपक्षी एकता पर सवाल

कांग्रेस से दूरी बनाने के डीएमके के फैसले ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। संसद के संभावित विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार की नजर है। डीएमके के 22 सांसदों का रुख अहम हो सकता है। क्या स्टालिन विपक्षी एकता से अलग रास्ता चुनेंगे?

Delimitation Bill India

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 17, 2026

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Delimitation Bill India : तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ती दूरी अब राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अहम मानी जा रही है। चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) रद्द करने जैसे मुद्दों पर डीएमके विपक्ष के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। हालांकि, पार्टी ने कांग्रेस के साथ किसी भी मंच पर साझा आंदोलन करने से इनकार कर दिया है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने खुद पार्टी नेताओं को इस संबंध में स्पष्ट संदेश दिया है।

स्टालिन ने नेताओं को दिया स्पष्ट संदेश

हाल ही में एमके स्टालिन ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन तेज करने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को मजबूती से उठाने के निर्देश दिए। पार्टी SIR को रद्द करने की मांग पर भी अपना रुख कायम रखेगी। इसके अलावा, डीएमके ने कथित तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि, कांग्रेस के साथ किसी भी मुद्दे पर साझा मंच बनाने या राजनीतिक मेलजोल बढ़ाने से बचने की बात कही गई है।

कांग्रेस पर पीछे से छुरा घोंपने का आरोप

रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि स्टालिन ने बैठक में कांग्रेस के रवैये पर नाराजगी जताई। उनका मानना बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने डीएमके के साथ विश्वासघात किया है। इसी वजह से पार्टी अब उससे बातचीत और सहयोग से दूरी बनाए रखना चाहती है। चर्चा यह भी है कि जरूरत पड़ने पर डीएमके क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर तीसरे मोर्चे की संभावना तलाश सकती है। हालांकि, इस राजनीतिक विकल्प को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल पर केंद्र की नजर

डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेद ऐसे समय सामने आए हैं, जब केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में बताई जा रही है। इस सत्र में परिसीमन यानी लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर फिर चर्चा हो सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार इन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा सकता है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार विशेष सत्र के जरिए राजनीतिक बढ़त हासिल करना चाहती है।

543 से 816 सीटों का प्रस्ताव

खबर में किए गए दावों के मुताबिक, लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने से जुड़े प्रस्ताव को 17 अप्रैल को जरूरी बहुमत नहीं मिल पाया था। अब सरकार के सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि एनडीए समर्थन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति और संभावित मतदान के अंतिम आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। ऐसे संवैधानिक बदलावों के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत का सवाल निर्णायक होगा।

समर्थन से बदल सकता है समीकरण

रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में डीएमके के 22 सांसद हैं और सरकार इस दल समेत कुछ अन्य पार्टियों से बातचीत कर रही है। एनडीए के समर्थकों का दावा है कि अतिरिक्त क्षेत्रीय दलों का साथ मिलने से विधेयकों के पक्ष में समर्थन बढ़ सकता है। राज्यसभा में भी सरकार बहुमत जुटाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, डीएमके के समर्थन या किसी राजनीतिक समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस से दूरी बनाने वाली डीएमके क्या परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार का साथ देगी या विपक्षी खेमे में ही बनी रहेगी।