DMK-Congress Alliance Ends: संसद में कांग्रेस के साथ नहीं बैठेंगे डीएमके सांसद, कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

तमिलनाडु चुनाव के नतीजों ने दिल्ली तक सियासी भूकंप ला दिया है। कांग्रेस द्वारा विजय की TVK सरकार को समर्थन देने के बाद DMK ने इसे 'पीठ में छुरा घोंपना' करार दिया है। कनिमोझी ने अब लोकसभा में सीटों के बदलाव की मांग कर गठबंधन के अंत पर अंतिम मुहर लगा दी है।

DMK-Congress Alliance Ends

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 8, 2026

DMK-Congress Alliance Ends:  भारतीय राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र लिखकर संसद में अपनी पार्टी के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। कनिमोझी का यह कदम महज एक प्रशासनिक अनुरोध नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट ऐलान है कि डीएमके और कांग्रेस के बीच दशकों पुराना गठबंधन अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो चुका है। इस घटनाक्रम ने न केवल तमिलनाडु की राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

कनिमोझी का पत्र और ‘बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियां’

7 मई को लिखे गए इस ऐतिहासिक पत्र में कनिमोझी ने अत्यंत कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने “बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों” का हवाला देते हुए कहा है कि चूंकि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन अब खत्म हो गया है, इसलिए डीएमके सांसदों का सदन में कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठना अब तर्कसंगत और उचित नहीं है। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि गठबंधन टूटने के बाद वर्तमान बैठने की व्यवस्था को जारी रखना अनुपयुक्त होगा। कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि डीएमके संसदीय दल को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में पहचान दी जाए और उनके सदस्यों के लिए अलग सीटों का आवंटन किया जाए।

अलगाव का मुख्य कारण: विजय की टीवीके और कांग्रेस की नजदीकी

इस अप्रत्याशित अलगाव की जड़ें तमिलनाडु की स्थानीय राजनीति में छिपी हैं। दरअसल, हाल ही में कांग्रेस ने तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को अपना समर्थन देने का फैसला किया था। कांग्रेस ने यह घोषणा भी की थी कि वह आगामी चुनाव विजय की पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ेगी। डीएमके के लिए यह फैसला एक बड़े विश्वासघात जैसा रहा, क्योंकि कांग्रेस और डीएमके लंबे समय से एक-दूसरे के सबसे मजबूत सहयोगी रहे थे। कांग्रेस के इस नए झुकाव ने डीएमके को अपनी राहें अलग करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे दक्षिण भारत का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है।

Dmk Letter To Lok Sabha Adhyaksha

संसद के गणित और विपक्षी एकता पर गहरा असर

डीएमके का ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग होना विपक्ष के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान है। वर्तमान में लोकसभा में डीएमके के 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। कुल 30 सांसदों की यह ताकत सदन में किसी भी विधेयक को पारित कराने या रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अब जब डीएमके एक स्वतंत्र गुट के रूप में कार्य करेगी, तो विपक्ष के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। इसका सीधा असर संसद में होने वाले मतदान और महत्वपूर्ण विधेयकों पर पड़ने वाली बहस पर पड़ेगा। डीएमके अब अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ जनता के मुद्दों को उठाने की तैयारी में है।

भविष्य की चुनौतियां और क्षेत्रीय राजनीति का नया अध्याय

अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिकी हैं। यदि कनिमोझी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाता है, तो सदन का ‘सीटिंग चार्ट’ बदल जाएगा और विपक्षी बेंचों पर डीएमके और कांग्रेस के बीच की दूरी स्पष्ट नजर आएगी। यह अलगाव न केवल संसद के भीतर के समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा और आम चुनावों में भी इसके दूरगामी परिणाम होंगे। तमिलनाडु की राजनीति अब त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रही है, जहाँ डीएमके अब खुद को कांग्रेस के प्रभाव से मुक्त कर एक स्वतंत्र क्षेत्रीय शक्ति के रूप में और अधिक मजबूती से पेश करने की कोशिश करेगी।