Diwali Safety: दिवाली पर पटाखों का धुआं किसके लिए है सबसे खतरनाक? इन 5 लोगों को रहना होगा सावधान

दिवाली पर पटाखे जलाने और आतिशबाजी देखने का उत्साह रहता है, लेकिन इनसे निकलने वाला धुआं सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अस्थमा के मरीजों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, दिल के मरीजों और बुजुर्गों को इससे खास खतरा है। जानिए पटाखों के धुएं से बचने के जरूरी उपाय।

Diwali Safety

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

नवम्बर 4, 2026

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Diwali Safety: दिवाली का त्योहार आते ही पटाखे जलाने और आतिशबाजी देखने का उत्साह बढ़ जाता है। बच्चे हों या बड़े, हर कोई रोशनी और आतिशबाजी का आनंद लेना चाहता है। लेकिन इस दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। खासकर सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह धुआं ज्यादा खतरनाक हो सकता है। पटाखों से निकलने वाले जहरीले धुएं में मौजूद छोटे-छोटे कण फेफड़ों तक पहुंचकर शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में दिवाली की खुशियों के बीच कुछ लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। आइए जानते हैं किन लोगों को पटाखों के धुएं से सबसे ज्यादा खतरा हो सकता है।

अस्थमा और सांस के मरीज पटाखों के धुएं से रहें दूर

जिन लोगों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी जैसी सांस की बीमारी है, उन्हें दिवाली पर पटाखों के धुएं से खासतौर पर बचना चाहिए। दरअसल, पटाखे जलने के बाद हवा में कई तरह के हानिकारक कण और गैसें फैल जाती हैं। ये सांस के रास्ते शरीर में पहुंचकर फेफड़ों और सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं।

अस्थमा और सांस के मरीज पटाखों के धुएं से रहें दूर

इसकी वजह से मरीजों को बार-बार खांसी आना, सीने में जकड़न और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों में अस्थमा का अटैक भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को पटाखे जलाने वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।

गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे भी बरतें सावधानी

दिवाली पर गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को भी पटाखों के धुएं से दूर रखना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। ऐसे में प्रदूषण के संपर्क में आना मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

वहीं, छोटे बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते हैं। वे बड़ों के मुकाबले तेजी से सांस लेते हैं। ऐसे में हवा में मौजूद प्रदूषण के बारीक कण उनके शरीर में ज्यादा आसानी से पहुंच सकते हैं। इससे बच्चों को खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को आतिशबाजी वाली जगहों से दूर रखें।

दिल के मरीजों के लिए भी खतरनाक है पटाखों का धुआं

पटाखों से निकलने वाला धुआं सिर्फ फेफड़ों ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत पर भी असर डाल सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से हार्ट से जुड़ी बीमारी है, उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। पटाखों से निकलने वाले पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे बारीक कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क में आने से शरीर में सूजन और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए हार्ट के मरीजों को ज्यादा प्रदूषण वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए।

बुजुर्गों को भी पटाखों के प्रदूषण से रहना चाहिए बचकर

बुजुर्गों को भी पटाखों के प्रदूषण से रहना चाहिए बचकर

बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। इसके अलावा फेफड़ों की काम करने की क्षमता भी पहले जैसी नहीं रहती। ऐसे में बुजुर्गों के लिए पटाखों का धुआं परेशानी बढ़ा सकता है। ज्यादा धुएं के संपर्क में आने से उन्हें खांसी, सांस फूलने और सीने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। खासकर जिन बुजुर्गों को पहले से सांस या दिल की बीमारी है, उन्हें दिवाली के दौरान घर के अंदर रहने और प्रदूषण से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

  • दिवाली पर पटाखों के धुएं से पूरी तरह बचना आसान नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके असर को कम किया जा सकता है। इसके लिए घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, ताकि बाहर का धुआं अंदर न आए। घर में एयर प्यूरीफायर है तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इसके अलावा पटाखे जलाने वाली जगहों पर जाने से बचें और धुएं के बीच ज्यादा देर तक न रहें। अगर किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। हालांकि, यह भी प्रदूषण से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।
  • अगर पटाखों के धुएं के संपर्क में आने के बाद सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार खांसी जैसी दिक्कत हो तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • डिस्क्लेमर: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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