Diwali 2026: दिवाली पर पटाखों का धुआं बच्चों और बुजुर्गों को कर सकता है बीमार, ऐसे करें बचाव

दिवाली पर पटाखों की रोशनी और खुशियों के बीच हवा में घुलता धुआं बच्चों और बुजुर्गों की सेहत बिगाड़ सकता है। अस्थमा और सांस की बीमारी से परेशान लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में घर के अंदर और बाहर किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानिए बचाव के तरीके।

दिवाली पर पटाखों का धुआं बच्चों और बुजुर्गों को कर सकता है बीमार

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

नवम्बर 8, 2026

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Diwali 2026: दीपावली का त्योहार रोशनी, खुशियों और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन लोग घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं और पटाखे जलाकर त्योहार का आनंद लेते हैं। हालांकि, पटाखों से निकलने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ा सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में त्योहार की खुशियों के साथ परिवार के कमजोर सदस्यों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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पटाखों का धुआं फेफड़ों और दिल के लिए खतरनाक

पटाखे जलने से हवा में PM2.5, PM10, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे हानिकारक प्रदूषक फैल सकते हैं। ये प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसके कारण गले में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी या दिल से जुड़ी बीमारी है, उनके लिए प्रदूषण ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है। बच्चों के फेफड़े संवेदनशील होते हैं, जबकि बुजुर्गों को उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दिवाली के दौरान इन दोनों आयु वर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर रखें

प्रदूषण से बचाव का सबसे आसान तरीका है कि बच्चों और बुजुर्गों को पटाखों के धुएं से दूर रखा जाए। खासकर सुबह और शाम के समय, जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो सकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से घर से बाहर न जाने दें। जिन स्थानों पर पटाखे जलाए जा रहे हों, वहां बच्चों और बुजुर्गों को बिल्कुल न ले जाएं। अगर परिवार के किसी सदस्य को अस्थमा, सीओपीडी या दिल की बीमारी है तो उसे प्रदूषित वातावरण में बाहर जाने से बचना चाहिए। बाहर टहलने के बजाय घर के अंदर हल्की एक्सरसाइज और दूसरी गतिविधियां की जा सकती हैं।

घर के अंदर की हवा को भी रखें साफ

सिर्फ बाहर का प्रदूषण ही नहीं, बल्कि घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी जरूरी है। प्रदूषण बढ़ने के समय दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, ताकि बाहर का धुआं घर के अंदर प्रवेश न कर सके। अगर घर में HEPA एयर प्यूरीफायर उपलब्ध है तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा घर के अंदर अगरबत्ती, धूप, मच्छर भगाने वाली कॉइल और मोमबत्तियां जलाने से बचें। इनसे भी धुआं और सूक्ष्म कण पैदा हो सकते हैं, जो सांस संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं।

हेल्दी डाइट, पानी और मास्क का रखें ध्यान

प्रदूषण के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना जरूरी है। उनकी डाइट में फल, हरी सब्जियां और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करें। हालांकि, मास्क प्रदूषण से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।

सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

अगर परिवार में किसी को पहले से सांस या दिल की बीमारी है तो उसकी निर्धारित दवाएं समय पर उपलब्ध रखें। प्रदूषण के दौरान लगातार खांसी, सांस फूलना, घरघराहट, सीने में जकड़न और असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सांस लेने में गंभीर परेशानी या सीने में तेज दर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर दिवाली को खुशहाल और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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