
Diwali 2026: दीपावली का पावन पर्व सनातन संस्कृति में सुख, समृद्धि और प्रकाश का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस वर्ष (2026) दीपावली को लेकर तिथि और मुहूर्त को लेकर विशेष स्थिति बनी है। आइए जानते हैं इस वर्ष दिवाली की तिथि, शुभ मुहूर्त, लक्ष्मी पूजन विधि और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने के अचूक उपायों के बारे में।
Choti Diwali 2026: नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाया जाता है यम दीपक? जानें
तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 (रविवार) को सुबह 11:29 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को सुबह 11:27 बजे तक रहेगी।
उदयातिथि का आधार: उदयातिथि के अनुसार कार्तिक अमावस्या 9 नवंबर को होगी, परंतु प्रदोष काल (जो लक्ष्मी पूजन के लिए मुख्य माना जाता है) 8 नवंबर को ही प्राप्त हो रहा है। 9 नवंबर को प्रदोष काल के समय शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। इसी कारण इस वर्ष दीपावली का पर्व 08 नवंबर 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा, जबकि 9 नवंबर को स्नान-दान की सोमवती अमावस्या रहेगी।
प्रमुख पूजा मुहूर्त
प्रदोष काल मुहूर्त: सायं काल 5:13 बजे से 7:49 बजे तक।
वृषभ काल (स्थिर लग्न): सायं काल 5:37 बजे से 7:34 बजे तक (लक्ष्मी पूजन के लिए यह समय अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है)।
निशीथ काल मुहूर्त: रात्रि 11:17 बजे से रात्रि 12:09 बजे तक (यह मुहूर्त तांत्रिक साधना, विशेष सिद्धि और महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है)।
सुख, शांति और समृद्धि पाने के अचूक उपाय

मां लक्ष्मी ऐश्वर्य और वैभव की देवी हैं। दीपावली के दिन उनकी विधिवत पूजा करने से घर में भौतिक सुखों के साथ-साथ अपार खुशियों का वास होता है। इन खास उपायों को अपनाकर आप माँ लक्ष्मी की कृपा पा सकते हैं:
तोरण लगाना: धर्मग्रंथों में आम के पेड़ को दैवीय वृक्ष माना गया है। दीपावली के दिन घर के मुख्य द्वार और पूजाघर के द्वार पर गेंदे के फूल और आम के पत्तों से बना तोरण (वारवाल) अवश्य लगाएं। वास्तु और धार्मिक दृष्टि से यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता को आकर्षित करता है।
स्वास्तिक का निर्माण: किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक बनाया जाता है। दीपावली के दिन पूजाघर की दीवारों या मुख्य द्वार के दोनों तरफ रोली या सिंदूर से स्वास्तिक चिह्न अवश्य बनाएं। यह भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
दीपावली पूजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम
दीपावली की पूजा और विधान से जुड़े कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है, शास्त्रों के अनुसार उत्तर दिशा को धन की दिशा माना गया है। चूंकि माँ लक्ष्मी धन की देवी हैं, इसलिए दीपावली की पूजा हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में ही करनी चाहिए। पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। हर साल दीपावली पूजन में नई लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का उपयोग करना चाहिए। पुरानी मूर्तियों को पूजन में शामिल नहीं करना चाहिए। हालांकि, यदि आपके पास चांदी की मूर्तियां हैं, तो उन्हें गंगाजल से शुद्ध करके दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।
माँ लक्ष्मी को लाल रंग अत्यंतप्रिय है। इसलिए दीपावली की पूजा में लाल रंग की वस्तुओं जैसे- लाल वस्त्र, लाल फूल और लाल श्रृंगार सामग्री का विशेष रूप से प्रयोग करना चाहिए। लक्ष्मी पूजन के दौरान शंख अवश्य बजाना चाहिए, क्योंकि इसकी ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही, मिट्टी के शुद्ध दीये जलाने से धार्मिक लाभ मिलने के साथ-साथ पर्यावरण और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।
दिवाली 2026: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक करें लक्ष्मी-गणेश पूजन, जानें शुभ समय
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।











