Sonam Wangchuk Hunger Strike: नीट यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रशासन द्वारा अस्पताल ले जाने और धरना स्थल को खाली कराने की कार्रवाई के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) की मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने इस घटना की तीखी आलोचना की है और बीजेपी सरकार को सीधे तौर पर ‘तानाशाह’ करार दिया है।
संवैधानिक अधिकारों पर हमला
बताते चले कि, सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाए जाने की प्रक्रिया को “लोकतंत्र और संविधान को कुचलने” जैसा गंभीर कदम बताया है। डिंपल यादव ने अपने तीखे तेवर दिखाते हुए लिखा, “बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं।” उन्होंने आगे जोड़ा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे लोगों की आवाज को दबाना न केवल तानाशाही है, बल्कि यह देश की सामूहिक चेतना और आत्मा को चोट पहुंचाने के समान है।
विरोध की नई लहर
उल्लेखनीय है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन सबसे पहले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) द्वारा शुरू किया गया था। समय के साथ यह आंदोलन युवाओं और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन से एक व्यापक रूप ले चुका है। हाल ही में सोनम वांगचुक का इस आंदोलन से जुड़ना और उनके स्वास्थ्य के बिगड़ते हालात ने सरकार पर भारी दबाव बनाया था। हालांकि, प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने अब इसे सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष की सीधी लड़ाई में तब्दील कर दिया है, जहां विपक्षी नेता इस मुद्दे को संवैधानिक अधिकारों के हनन के रूप में पेश कर रहे हैं।










