Satluj: मशहूर अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की नई फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर यह फिल्म जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर शुक्रवार को रिलीज होने के महज 48 घंटों के भीतर ही इस फिल्म को अचानक हटा दिया गया, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया। इसके बावजूद, लोग इस फिल्म को देखने के लिए इतने उत्सुक हैं कि सोशल मीडिया पर लीक हुए वीडियो डाउनलोड करके इसे देख रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच, फिल्म के डायरेक्टर ने दिलजीत दोसांझ को लेकर एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने सभी का दिल जीत लिया है।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से लंबा संघर्ष
फिल्म ‘सतलुज’ का विवादों से पुराना नाता रहा है। यह फिल्म पिछले 4 सालों से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के चक्कर काट रही थी और सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण रिलीज नहीं हो पा रही थी। लंबे संघर्ष के बाद जब इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म जी5 पर जगह मिली, तो दर्शकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन रिलीज के सिर्फ दो दिनों के भीतर इसे प्लेटफॉर्म से डिलीट कर दिया गया। फिल्म के इस तरह अचानक गायब होने पर खुद दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम लाइव आकर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की थी।
दिलजीत दोसांझ की दरियादिली
इस विवाद के बीच फिल्म के सह-निर्माता और डायरेक्टर हनी त्रेहान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि दिलजीत दोसांझ ने इस बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फिल्म में काम करने के लिए मेकर्स से एक भी रुपया चार्ज नहीं किया है। हनी त्रेहान ने बताया कि जब उन्होंने दिलजीत को फिल्म की कहानी सुनाई, तो अभिनेता ने फीस की बात करने के बजाय तुरंत हाथ जोड़ लिए और ‘वाहेगुरु जी’ कहते हुए बिना कोई पैसा लिए फिल्म करने के लिए हामी भर दी।
पंजाब की 1984 की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
निर्देशक हनी त्रेहान ने उस दिलचस्प मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने दिलजीत पाजी से संपर्क किया था, तब उन्होंने कहा था कि वे वर्ष 1984 के सिख दंगों के बाद के पंजाब पर एक गंभीर फिल्म बनाना चाहते हैं। इस पर दिलजीत ने बेहद भावुक होकर कहा था कि ‘सच कहूं तो, 1984 के काले दौर के बाद पंजाब में ऐसी बहुत कम कहानियां बची हैं जिन पर पूरी फिल्म बनाई जा सके।’ हालांकि, दिलजीत के मन में एक ऐसी शख्सियत की कहानी जरूर थी, जिसे वे परदे पर लाना चाहते थे।
जसवंत सिंह खालड़ा की अनकही दास्तान
बातचीत के दौरान दिलजीत ने निर्देशक को बताया था कि पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा पर एक बेहतरीन फिल्म बन सकती है, लेकिन उनका परिवार किसी को भी बायोपिक के राइट्स (अधिकार) नहीं देता है। पूरा पंजाब इसके लिए कोशिश कर चुका है। इसके बाद हनी त्रेहान ने अपनी रिसर्च बुक निकाली जिसके पहले पन्ने पर जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर के साथ ‘JSK’ लिखा था। निर्देशक ने जैसे ही कहा कि वे इसी महान शख्सियत की कहानी लेकर आए हैं और दिलजीत को ही यह मुख्य किरदार निभाना है, तो दिलजीत भावुक हो गए और उन्होंने बिना समय गंवाए शूटिंग की तारीख और जगह पूछ ली।










