बोकारो-हजारीबाग में डिजिटल सेंधमारी, रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर फर्जी भुगतान

रांची  झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा जिलों में पुलिसकर्मियों के वेतन के नाम पर करोड़ों की अवैध निकासी ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। सीआइडी की विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में जो खुलासे हो रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। ऐसे हुआ 'डिजिटल सेंधमारी' का खेल जांच में सामने आया है कि इस पूरे महाघोटाले की धुरी 'ओटीपी' (OTP) और अधिकारियों का अपने अधीनस्थों पर अंधविश्वास रहा है। एसआइटी के अनुसार, पुलिसकर्मियों के वेतन निर्माण के लिए एक विशेष पोर्टल का उपयोग होता है, जिसमें जिले के स्वीकृत बल का पूरा डेटाबेस होता है।

Wrriten By :

Editor

Published On :

मई 1, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

रांची

 झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा जिलों में पुलिसकर्मियों के वेतन के नाम पर करोड़ों की अवैध निकासी ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। सीआइडी की विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में जो खुलासे हो रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

ऐसे हुआ 'डिजिटल सेंधमारी' का खेल
जांच में सामने आया है कि इस पूरे महाघोटाले की धुरी 'ओटीपी' (OTP) और अधिकारियों का अपने अधीनस्थों पर अंधविश्वास रहा है। एसआइटी के अनुसार, पुलिसकर्मियों के वेतन निर्माण के लिए एक विशेष पोर्टल का उपयोग होता है, जिसमें जिले के स्वीकृत बल का पूरा डेटाबेस होता है।

स पोर्टल पर किसी भी तरह के बदलाव- जैसे जन्मतिथि सुधारना या बैंक खाता नंबर बदलना। इसके लिए संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) के रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक ओटीपी आता है।

कमजोर कड़ी बना दिया सुरक्षा चक्र को
घोटालेबाजों ने इसी सुरक्षा चक्र को सबसे कमजोर कड़ी बना दिया। जांच में पाया गया कि जिले के डीडीओ (आमतौर पर डीएसपी स्तर के अधिकारी) अन्य पुलिसिंग कार्यों में व्यस्त रहते थे।

बार-बार ओटीपी बताने के झंझट से बचने के लिए उन्होंने अपना मोबाइल और मास्टर लॉग-इन का एक्सेस लेखापालों (Accountants) को दे दिया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर लेखापालों ने पूरा सिस्टम हैक कर लिया।

रिटायर्ड कर्मी बन गए 'कमाऊ पूत'
धोखाधड़ी का तरीका बेहद शातिर था। लेखापालों ने उन पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जो रिटायर हो चुके थे।

        जन्मतिथि में हेरफेर: मास्टर लॉगइन के जरिए रिटायर्ड कर्मियों की उम्र कागजों में 2 से 4 साल कम कर दी गई ताकि वे रिकॉर्ड में कार्यरत दिखें।
        खाता नंबर का खेल: पोर्टल पर संबंधित कर्मी के मूल खाते की जगह लेखापाल ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खाते फीड कर दिए।
        दोहरा लाभ: हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ वह कर्मी अपने मूल दस्तावेजों पर पेंशन ले रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसके फर्जी वर्किंग रिकॉर्ड के आधार पर वेतन की राशि सीधे घोटालेबाजों के खातों में जा रही थी।

एसआइटी की रडार पर विश्वासघात
बोकारो के गिरफ्तार लेखापाल कौशल कुमार पांडेय और हजारीबाग के शंभू कुमार से पूछताछ में इस मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका) की पुष्टि हुई है। एसआइटी अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या डीडीओ सिर्फ लापरवाह थे या फिर इस बंदरबांट में उनकी भी कोई गुप्त हिस्सेदारी थी।

फिलहाल, प्रथम दृष्ट्या यह भारी विश्वासघात का मामला प्रतीत हो रहा है, जिसने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है। जांच टीम सच्‍चाई को खंगालने में जुटी हुई है।

 

Leave a Comment

2