DIG भुल्लर की मुश्किलें गहराईं, CFSL रिपोर्ट आई सामने, CBI की प्रारंभिक जांच मंजूर, पंजाब के अफसर रडार पर

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में रिश्वत मामले में फंसे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्णु शारदा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर प्रारंभिक जांच (पीई) से संबंधित अर्जी को मंजूर कर लिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। जांच एजेंसी को नए और अहम सबूत मिले हैं, जिनसे पंजाब के कई IAS-IPS अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। सीबीआई ने अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (प्रिलिमनरी इंक्वायरी) जांच शुरू कर दी

Wrriten By :

Editor

Published On :

अप्रैल 25, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

चंडीगढ़ 

चंडीगढ़ में रिश्वत मामले में फंसे पंजाब पुलिस के सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्णु शारदा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष अदालत ने सीबीआई की ओर से दायर प्रारंभिक जांच (पीई) से संबंधित अर्जी को मंजूर कर लिया।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख तय की है, जिसमें आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। जांच एजेंसी को नए और अहम सबूत मिले हैं, जिनसे पंजाब के कई IAS-IPS अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। सीबीआई ने अज्ञात अफसरों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (प्रिलिमनरी इंक्वायरी) जांच शुरू कर दी है।

बचाव पक्ष ने किया विरोध
सीबीआई की ओर से दायर इस अर्जी का दोनों आरोपियों की तरफ से विरोध किया गया था। बचाव पक्ष ने अदालत में अपने अलग-अलग जवाब दाखिल करते हुए कहा कि सीबीआई की यह अर्जी कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने दलील दी कि यह अर्जी अधिकार क्षेत्र से बाहर है और कानून के निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं करती, इसलिए इसे मंजूर नहीं किया जाना चाहिए।

बचाव पक्ष के वकीलों ने यह भी कहा कि जांच एजेंसी बिना उचित आधार के कार्रवाई करना चाहती है और इस तरह की अनुमति देने से आरोपियों के अधिकारों का हनन हो सकता है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सीबीआई की इस अर्जी को खारिज किया जाए और उन्हें किसी भी तरह की अतिरिक्त जांच की अनुमति न दी जाए।

वहीं, सीबीआई की तरफ से दलील दी गई कि मामले में नए और अहम सबूत सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है। एजेंसी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मामले की सच्चाई तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार किया और अंततः सीबीआई की अर्जी को मंजूरी दे दी। अदालत के इस फैसले से जांच एजेंसी को आगे की कार्रवाई करने और मामले की गहराई से जांच करने का अधिकार मिल गया है।

CFSL रिपोर्ट अदालत में पेश
सुनवाई के दौरान केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई, जिसे इस मामले में अहम कड़ी माना जा रहा है। यह रिपोर्ट उन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के आधार पर तैयार की गई है, जिन्हें पहले जांच एजेंसी ने जब्त कर फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा था।

माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट में शिकायतकर्ता और कथित बिचौलिए के बीच हुई बातचीत की ऑडियो सीडी या उससे संबंधित विश्लेषण शामिल हो सकता है। फॉरेंसिक जांच के जरिए इन ऑडियो क्लिप्स की सत्यता, एडिटिंग या छेड़छाड़ की संभावना और आवाज की पहचान जैसे पहलुओं की जांच की जाती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बातचीत असली है या नहीं।

यदि रिपोर्ट में बातचीत प्रमाणित होती है, तो यह मामले में एक मजबूत साक्ष्य के तौर पर सामने आ सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कथित रूप से किस तरह रिश्वत की मांग या बातचीत की गई थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। इसी कारण CFSL रिपोर्ट को इस केस में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर आगे की सुनवाई और जांच की दिशा काफी हद तक निर्भर कर सकती है।

मोबाइल, दस्तावेज और नकदी जब्त करने की मांगी अनुमति
सीबीआई ने मार्च में दायर अपनी प्रारंभिक जांच (पीई) अर्जी में अदालत से आरोपियों के मोबाइल फोन, मूल दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य संबंधित वस्तुएं व नकदी अपने कब्जे में लेने की अनुमति मांगी थी। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान कुछ अहम इलेक्ट्रॉनिक सबूत सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।

सीबीआई के मुताबिक, मोबाइल फोन, चैट्स, लैपटॉप और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड में ऐसे सुराग मिल सकते हैं, जो पूरे मामले की सच्चाई तक पहुंचने में मदद करेंगे। इसलिए इन सभी चीजों को जब्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच कराना जरूरी बताया गया है, ताकि आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।

DIG से पूछताछ में 14 अफसरों के नाम मिले CBI ने हरचरण सिंह भुल्लर को गिरफ्तार करने के बाद पहली बार 5 दिन का रिमांड लिया। CBI सोर्सेज के मुताबिक भुल्लर ने बताया कि पंजाब के अफसर पटियाला के प्रॉपर्टी डीलर के जरिए प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करते हैं। इस पूछताछ में CBI को ऐसे 14 अफसरों का पता चला, जिसमें 10 IPS और 4 IAS अधिकारी थे।

CBI ने जब छानबीन की तो पता चला कि 10 IPS में से 8 अभी भी फील्ड में अहम पदों पर तैनात हैं। वहीं 2 पंजाब पुलिस की एकेडमी में हैं। इसके अलावा 4 IAS अफसरों का संबंध किसी ने किसी तरह से मंडी गोबिंदगढ़ से है। इसके बाद CBI ने प्रॉपर्टी डीलर के पटियाला और लुधियाना के ठिकानों पर रेड कर डॉक्यूमेंट्स जब्त किए थे।

बिचौलिए कृष्नु के मोबाइल से 50 अफसरों के लिंक मिले CBI कोर्ट में DIG हरचरण भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा की पेशी के दौरान जांच एजेंसी ने एक प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया कि पिछले रिमांड में कृष्णु शारदा के मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगाली गईं। इसके जरिए पता चला कि वह कई अफसरों की करप्ट डीलिंग में शामिल था।

CBI ने डेटा के आधार पर बताया कि कृष्णु शारदा अफसरों के साथ मिलकर न केवल केसों की जांच को प्रभावित करता था बल्कि ट्रांसफर-पोस्टिंग, आर्म्स लाइसेंस बनवाने से लेकर FIR दर्ज करवाने या पहले से दर्ज FIR खारिज करवाने तक का काम करता था। ऐसे करीब 50 अफसर हैं, जिनमें IAS और IPS अफसर भी शामिल हैं।

Leave a Comment

2