Diabetes Treatment: डायबिटीज से जूझ रहे करोड़ों भारतीयों के लिए एक सुखद और क्रांतिकारी खबर सामने आई है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) ने भारत में अपना ‘वीकली इंसुलिन’ लॉन्च किया है, जिसे ‘अवीक्ली’ (Awiqli) ब्रांड नाम से बाजार में उतारा गया है। यह दवा उन मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है, जिन्हें रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की पीड़ा और झंझट से मुक्ति चाहिए।
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मरीजों के लिए क्यों है यह खास?
भारत में बड़ी संख्या में डायबिटीज के मरीज इंसुलिन थेरेपी शुरू करने से केवल इसलिए हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें रोजाना सुई लगवाने का डर होता है। व्यस्त जीवनशैली, बार-बार यात्रा करना या समय पर इंसुलिन न ले पाना अक्सर ब्लड शुगर को अनियंत्रित कर देता है। डॉक्टरों का मानना है कि यह साप्ताहिक इंसुलिन न केवल इलाज को सुविधाजनक बनाता है, बल्कि मरीजों की अनुपालन क्षमता (Compliance) को भी बढ़ाता है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. एस. के. वांगनू के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के ऐसे मरीज जिन्हें 8-10 वर्षों से बीमारी है और दवाइयों से शुगर कंट्रोल नहीं हो रही, उन्हें समय पर इंसुलिन शुरू करना चाहिए। इससे भविष्य में किडनी, आंखों, नसों और हृदय संबंधी गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है।
इलाज का खर्च और उपलब्धता
आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह नई तकनीक काफी किफायती है। कंपनी के अनुसार, इस इंसुलिन की औसत लागत लगभग 261 रुपये प्रति सप्ताह है, यानी मरीज का दैनिक खर्च महज 50 रुपये के आसपास पड़ता है। यह दवा बाजार में दो प्रकार के प्री-फिल्ड पेन (700 यूनिट/मिली और 2,100 यूनिट/मिली) में उपलब्ध कराई गई है। सामान्य तौर पर, एक मरीज को साप्ताहिक रूप से करीब 70 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, लेकिन खुराक का निर्धारण पूरी तरह से मरीज की व्यक्तिगत मेडिकल स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करेगा।
सावधानी और संभावित दुष्प्रभाव
सुविधाजनक होने के बावजूद, चिकित्सा विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियां भी बरतने की सलाह दी है। इस दवा का सबसे आम दुष्प्रभाव ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ (ब्लड शुगर का अत्यधिक गिर जाना) हो सकता है, जिसका जोखिम रोजाना लगने वाले इंसुलिन जितना ही है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को अपनी फास्ट-एक्टिंग इंसुलिन (भोजन से पहले लगने वाली) जारी रखनी होगी।
केवल लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन की जगह ही इस साप्ताहिक विकल्प का उपयोग किया जा सकता है।
इसे कभी भी बिना डॉक्टरी परामर्श के खुद से शुरू या बंद नहीं करना चाहिए।
भारत में लॉन्च हुई साप्ताहिक इंसुलिन Awiqli, डायबिटीज मरीजों को रोजाना इंजेक्शन से मिल सकती है राहत










