
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भगवान श्रीकृष्ण पर की गई उनकी टिप्पणी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्यालय के बाहर लगे कुछ होर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन होर्डिंग के जरिए धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा गया है। उन्हें ढोंगी, पाखंडी और व्यापारी तक बताया गया है। होर्डिंग सामने आने के बाद यह मामला अब धार्मिक के साथ-साथ सियासी रंग भी लेता दिखाई दे रहा है।
लखनऊ में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ लगे होर्डिंग
लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर लगाए गए इन होर्डिंग में भगवान राम और श्रीकृष्ण की तस्वीरें एक तरफ लगाई गई हैं, जबकि दूसरी तरफ धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर दिखाई दे रही है। खास बात यह है कि उनकी तस्वीर पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाया गया है। होर्डिंग के नीचे रुपेश यादव और सुजीत यादव की तस्वीरों के साथ उनके नाम और पद भी लिखे गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये होर्डिंग सुजीत यादव नाम के शख्स ने लगवाए हैं। इसके बाद से ही इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
पोस्टर में लिखे नारों से मचा बवाल
होर्डिंग पर लिखे नारे ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। इसमें लिखा है, “न प्रभु राम तुम्हारे हैं, न श्रीकृष्ण हमारे हैं, राम-कृष्ण तो इस संसार के प्यारे हैं। जो इनमें भेद बताए, वो कथावाचक नहीं, ढोंगी पाखंडी व्यापारी है।”इस संदेश के जरिए भगवान राम और श्रीकृष्ण को एक ही सनातन परंपरा का हिस्सा बताते हुए दोनों के बीच तुलना करने वालों पर सवाल उठाया गया है। पोस्टर लगाने वालों का कहना है कि धर्म और कथा के नाम पर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना ठीक नहीं है।
सुजीत यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर लगाए गंभीर आरोप

होर्डिंग लगवाने वाले सुजीत यादव का कहना है कि कथा के नाम पर व्यापार करने वाले कुछ लोग देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, धीरेंद्र शास्त्री ने पहले भगवान श्रीकृष्ण को लेकर टिप्पणी की और अब भगवान राम को लेकर भी विवादित बातें कर रहे हैं।सुजीत यादव ने ऐसे कथावाचकों से दूरी बनाने की अपील करते हुए कहा कि सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को धर्म के नाम पर समाज को बांटने वालों से सावधान रहना चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ लोग कथा के जरिए लोगों को जोड़ने के बजाय उनके बीच भेदभाव पैदा कर रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत 29 अक्टूबर को हुई थी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए एक प्रसंग सुनाया था। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के लिए ‘टेढ़े’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया।बयान सामने आने के बाद अयोध्या और मथुरा समेत देश के कई हिस्सों में विरोध देखने को मिला। कई संतों ने भी इस टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि भगवान राम और श्रीकृष्ण दोनों एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं। ऐसे में किसी एक की तुलना दूसरे से करना या उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
अखिलेश यादव ने भी की थी कार्रवाई की मांग
इस विवाद में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी कूद चुके हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। साथ ही लोगों से ऐसे कथावाचकों का बहिष्कार करने की अपील भी की थी।
अब लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर लगे इन होर्डिंग के बाद विवाद को एक बार फिर हवा मिल गई है। भगवान श्रीकृष्ण पर टिप्पणी से शुरू हुआ मामला अब धार्मिक विरोध से आगे बढ़कर राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में देखना होगा कि धीरेंद्र शास्त्री की ओर से इस नए विरोध पर क्या प्रतिक्रिया आती है और यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है।











