Monsoon Session: नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर देश भर में युवाओं और छात्रों के चले भारी विरोध प्रदर्शन के बीच भले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनकी साख और रसूख पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। इसका जीवंत उदाहरण सोमवार (27 जुलाई 2026) को संसद परिसर में देखने को मिला, जब इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। वहां सत्ताधारी पार्टी और एनडीए गठबंधन के सहयोगियों ने ‘धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद’ के जोरदार नारों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। सत्ताधारी खेमे की इस एकजुटता को देखकर संसद में मौजूद विपक्षी दल काफी असहज नजर आए, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस प्रदर्शन पर तीखी आपत्ति जताते हुए भाजपा पर बड़ा हमला बोला है।
धर्मेंद्र प्रधान का संसद भवन के मकर द्वार पर हुआ भव्य सत्कार
ओडिशा के संबलपुर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद धर्मेंद्र प्रधान जब सोमवार को संसद के मानसून सत्र में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे, तो वहां का माहौल काफी अलग था। गठबंधन के साथी सांसद उन्हें गाड़ी से उतारकर पूरी गर्मजोशी के साथ नारे लगाते हुए संसद भवन के भीतर ले गए। इस दौरान संसद के मकर द्वार पर बिहार के दरभंगा से सांसद गोपालजी ठाकुर ने आगे बढ़कर धर्मेंद्र प्रधान को पारंपरिक मैथिल पाग पहनाई और शॉल ओढ़ाकर उनका विशेष सम्मान किया। अपने सहपाठियों और राजनीतिक सहयोगियों से मिले इस अप्रत्याशित समर्थन और स्वागत-सत्कार से अभिभूत होकर धर्मेंद्र प्रधान ने दोनों हाथ जोड़कर सभी का आभार जताया और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।
कांग्रेस और विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के जोरदार स्वागत पर जताई कड़ी आपत्ति
दूसरी ओर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के महज कुछ ही दिनों बाद संसद परिसर में धर्मेंद्र प्रधान के इस प्रकार हुए जोरदार स्वागत पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने एनडीए गठबंधन पर करारा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल एक ऐसे नेता का महिमामंडन कर रहे हैं, जिन्होंने देश के सबसे बड़े परीक्षा संकट और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था। विपक्ष का कहना है कि जहां एक तरफ लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, वहीं सत्ता पक्ष इस तरह का जश्न मनाकर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर सियासी पारे को एक बार फिर से सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।










