
Dhanteras 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले धनतेरस के पावन पर्व का सनातन धर्म में विशेष स्थान है। इस दिन को मुख्य रूप से ‘धन्वंतरि जयंती’ के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस से ही पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व की शुरुआत हो जाती है। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की विधिवत पूजा की जाती है, जो हमें धन-वैभव के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का संदेश देता है।
धनतेरस पूजा के शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए निम्नलिखित मुहूर्त अत्यंत शुभ माने गए हैं।
पूजा का मुख्य मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 05:33 बजे से रात्रि 08:09 बजे तक
वृषभ काल: शाम 06:02 बजे से रात्रि 07:57 बजे तक
भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार पूजा विधि

धनतेरस के दिन आरोग्य और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए। पूजा की शुरुआत में भगवान धन्वंतरि के समक्ष शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं। देवता के मस्तक पर हल्दी, चंदन और अक्षत (चावल) लगाएं। उन्हें ताजे फूलों की माला और पुष्प अर्पित करें। स्वास्थ्य लाभ और आरोग्यता के लिए उनके विशेष मंत्र का मन ही मन स्मरण व जाप करें। अंत में उनकी आरती गाकर सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
दीपदान: पूजा के उपरांत घर के मुख्य द्वार, आंगन और सभी कोनों में दीये जलाएं। विशेष रूप से यमराज के निमित्त दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक यम का दीया अवश्य प्रज्ज्वलित किया जाता है।
आरोग्य प्राप्ति का महामंत्र

पूजा के दौरान भगवान धन्वंतरि के इस शाश्वत मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। “ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥”
भगवान धन्वंतरि की पौराणिक कथा और प्राकट्य
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब चौदह रत्न निकले थे, उन्हीं में से एक भगवान धन्वंतरि भी थे जो अपने दोनों हाथों में अमृत का कलश थामे प्रकट हुए थे। भगवान विष्णु के अंश (अवतार) माने जाने वाले धन्वंतरि जी को संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रथम वैद्य और चिकित्सक कहा जाता है। उन्होंने ही संसार को आरोग्यता प्रदान करने के लिए आयुर्वेद शास्त्र का ज्ञान दिया था। यही कारण है कि उनके प्राकट्य दिवस को ‘धनतेरस’ के रूप में मनाकर मानव समाज अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी काया की प्रार्थना करता है।
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