Uttarakhand Cabinet Expansion 2026: उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कैबिनेट विस्तार का निर्णय लिया है। यह कदम न केवल संगठनात्मक मजबूती के लिए उठाया गया है बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों और वोट बैंक को साधने की रणनीति भी इसमें शामिल है। लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें चल रही थीं, जिन्हें अब विराम मिलने वाला है।
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2022 चुनाव और वर्तमान स्थिति

साल 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में कुल 70 सीटों पर मुकाबला हुआ था। बीजेपी ने 47 सीटें जीतकर दूसरी बार सरकार बनाई, हालांकि यह आंकड़ा पिछली बार से 10 सीट कम था। कांग्रेस को मात्र 19 सीटें मिलीं। अब चुनाव से लगभग एक साल पहले कैबिनेट विस्तार किया जा रहा है। आज शाम राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई जाएगी।
संगठन का संकेत और नेतृत्व की भूमिका
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कई बार विस्तार का संकेत दे चुके हैं। महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट किया था कि संगठन ने खाली पदों को भरने के लिए केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखी थी। इस विस्तार में विधायकों के प्रदर्शन और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखा जा रहा है। साथ ही कुछ वरिष्ठ नेताओं को राज्य मंत्री स्तर की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
संभावित नए चेहरे
कैबिनेट विस्तार में जिन पांच विधायकों के नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं, वे हैं:
राजपुर से खजानदास
नैनीताल से सरिता आर्य
रुड़की से प्रदीप बत्रा
देवप्रयाग से विनोद कंडारी
रामनगर से दीवान सिंह बिष्ट
आज शाम तक इन नामों पर अंतिम मुहर लग जाएगी और नए मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे।
संवैधानिक प्रावधान और मंत्रियों की संख्या
भारतीय संविधान के 91वें संशोधन (2003) के अनुसार, किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती। साथ ही न्यूनतम संख्या 12 होना अनिवार्य है। उत्तराखंड विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, इसलिए अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित केवल 7 मंत्री हैं, जबकि 5 पद खाली हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के निधन और प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद यह स्थिति बनी।
उत्तराखंड कैबिनेट विस्तार न केवल संगठनात्मक मजबूती का प्रतीक है बल्कि आगामी चुनावों के लिए रणनीतिक कदम भी है। नए चेहरों को शामिल कर सरकार क्षेत्रीय संतुलन साधने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी। आज शाम होने वाला शपथ ग्रहण समारोह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।









