टकराव के बावजूद अमेरिका को 90 अरब डॉलर का फायदा, ट्रंप की रणनीति रंग लाई

तेहरान  ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय

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Published On :

मई 8, 2026

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तेहरान 
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच अमेरिका के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिका की जमीन के नीचे ऐसा खजाना मिला है, जो आने वाले कई दशकों तक उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरी तरह बदल सकता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी (USGS) ने खुलासा किया है कि देश के एपलाचियन पर्वतीय क्षेत्र में भारी मात्रा में लिथियम मौजूद है. जिसकी अनुमानित कीमत करीब 90 अरब डॉलर बताई जा रही है. यह ईरान युद्ध में हुए नुकसान और खर्च लगभग 25 बिलियन डॉलर से कहीं ज्यादा है. यह खोज ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी टेक्नोलॉजी की मांग तेजी से बढ़ रही है। 

अमेरिका की लिथियम खोज क्यों है खास
रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2.3 मिलियन मीट्रिक टन लिथियम ऑक्साइड मौजूद है. यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि आने वाली कई पीढ़ियों तक अमेरिका की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यही वजह है कि इस खोज को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह लिथियम मुख्य रूप से कैरोलिना क्षेत्र के ‘टिन-स्पोड्यूमीन बेल्ट’ में पाया गया है. यह इलाका पहले भी दुनिया का प्रमुख लिथियम स्रोत रह चुका है, लेकिन समय के साथ यहां खनन गतिविधियां कम हो गई थीं. अब एक बार फिर यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा के नक्शे पर लौटता हुआ नजर आ रहा है. खास बात यह है कि यहां पाया जाने वाला स्पोड्यूमीन एक ऐसा खनिज है, जिससे सीधे लिथियम निकाला जा सकता है, जो बैटरियों के लिए बेहद जरूरी होता है। 

चीन की नहीं होगी जरूरत
 रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक अमेरिका अपनी लिथियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता रहा है. खासकर चीन और चिली जैसे देशों पर उसकी निर्भरता ज्यादा रही है. लेकिन इस नई खोज के बाद अमेरिका के पास मौका है कि वह अपनी घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करे और विदेशी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दे. दुनिया भर में लिथियम को ‘व्हाइट गोल्ड’ यानी सफेद सोना कहा जाने लगा है. इसकी वजह है इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2040 तक लिथियम की मांग में करीब 40 गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है. अनुमान है कि इस भंडार से करीब 13 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां तैयार की जा सकती हैं। 

 

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