Delimitation Bill: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को प्रस्तावित Delimitation Bill यानी परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में पिछले 25 वर्षों के दौरान जिन राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू किया है, उन्हें परिसीमन के कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर पर नुकसान नहीं उठाना चाहिए। पी चिदंबरम ने खास तौर पर दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा किए जाने की मांग की।
परिसीमन बिल और दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व
बताते चले कि, पी चिदंबरम ने कहा कि परिसीमन बिल को लागू करने से पहले इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों ने परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू किया और जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में केवल जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण से इन राज्यों का प्रतिनिधित्व कम होना उनके साथ अन्याय होगा।
लोकसभा की 543 सीटें बरकरार रखने की मांग
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को बरकरार रखने की वकालत की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या में बहुत बड़ी वृद्धि की जाती है तो सदन का मौजूदा स्वरूप बदल सकता है। चिदंबरम के मुताबिक, लोकसभा की सदस्य संख्या में अत्यधिक बढ़ोतरी से सदन की कार्यप्रणाली और उसकी गरिमा पर भी असर पड़ सकता है।
परिवार नियोजन करने वाले राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए
पी चिदंबरम ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने वाले राज्यों को उनकी सफलता की कीमत राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी के रूप में नहीं चुकानी चाहिए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों ने लंबे समय तक परिवार नियोजन नीतियों को लागू किया है। इसलिए भविष्य में होने वाली किसी भी परिसीमन प्रक्रिया में इन राज्यों की लोकसभा हिस्सेदारी को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी सुरक्षित करने की मांग
कांग्रेस नेता ने केंद्र से मांग की कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने का रास्ता निकाला जाए। उनका तर्क है कि यदि सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीतियां अपनाईं, उन्हें भविष्य में राजनीतिक नुकसान हो सकता है। उन्होंने इसे नीति के स्तर पर गलत संदेश बताया।
JPC में परिसीमन बिल का विरोध करेगी कांग्रेस
पी चिदंबरम ने साफ किया कि कांग्रेस प्रस्तावित Delimitation Bill का संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC में विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस कानून को वापस लेने की मांग करेगी। चिदंबरम के अनुसार, परिसीमन को लेकर ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित हो।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी बोले चिदंबरम
परिसीमन विवाद के साथ ही पी चिदंबरम ने झारखंड में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की निंदा की है। कांग्रेस नेता के मुताबिक, छात्रों की आवाज और उनके लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
परिसीमन को लेकर सियासत तेज
परिसीमन बिल, लोकसभा सीटों की संख्या और दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। एक तरफ सरकार की ओर से परिसीमन की जरूरत को लेकर तर्क दिए जा सकते हैं, वहीं कांग्रेस सहित विपक्षी दल दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व और जनसंख्या नियंत्रण की नीतियों को आधार बनाकर इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित विधेयक पर संसद और JPC में होने वाली चर्चा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










