Delhi State Name: केरल के बाद दिल्ली की पहचान भी बदलने की तैयारी? सांसद का नया प्रस्ताव

सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने एक अलग पत्र में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अनुरोध किया है कि विधानसभा में दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

Delhi State Name: दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद और कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ किया जाए। उनका कहना है कि यह कदम भारत की राजधानी की ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली के किसी उपयुक्त स्थान, संभवतः पुराना किला, में पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएँ, जिससे प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को जीवित किया जा सके।

खंडेलवाल ने इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी अनुरोध किया है कि दिल्ली विधानसभा में नाम बदलने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और इसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम उसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

Delhi State Name
दिल्ली की पहचान भी बदलने की तैयारी

सांसद खंडेलवाल ने बताया कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह दर्शाती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल थी। महाकाव्य महाभारत में इसे पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी बताया गया है, जो यमुना नदी के तट पर स्थित थी। महाभारत के विवरण के अनुसार यह नगर समृद्ध और भव्य था, और इसका भौगोलिक स्वरूप आज की दिल्ली से मेल खाता है।

खंडेलवाल ने पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 1000 ईसा पूर्व की बसावट के प्रमाण मिले हैं। इनमें पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) संस्कृति के अवशेष शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोजें इस धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ वही स्थान है जहाँ आज दिल्ली स्थित है।

वर्तमान नाम और ऐतिहासिक संदर्भ

सांसद ने कहा कि ‘दिल्ली’ नाम मध्यकालीन समय में प्रचलित हुआ और इसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं। यह नाम राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है और इसे अपनाना भारत की प्राचीन विरासत से संबंध को पुनर्स्थापित करेगा।

खंडेलवाल ने यह भी बताया कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पहले ही पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जैसे मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज, और दिल्ली में भी इंद्रप्रस्थ नाम का प्रचलन कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में देखा जाता है।

प्रस्तावित कदम और राष्ट्रीय गौरव

सांसद का कहना है कि दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करना राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करने और भारत की प्राचीन विरासत को विश्व के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का एक ऐतिहासिक कदम होगा। उन्होंने गृह मंत्री से अनुरोध किया है कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों की सलाह लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए।

खंडेलवाल ने निष्कर्ष में कहा कि यह कदम न केवल ऐतिहासिक विसंगति को दूर करेगा, बल्कि भारत की महान सभ्यता की विरासत को सम्मान देने और संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को भी सशक्त करेगा।

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