Rohini Building Collapsed: ताश के पत्तों की तरह ढह गई चार मंजिला इमारत, मलबे के नीचे से आई आवाज तो कांप गए लोग

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में बुधवार शाम एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि बिल्डिंग मालिक और कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें क्रेन और जेसीबी की मदद से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

Rohini Building Collapsed

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 9, 2026

Rohini Building Collapsed: देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके से एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा सामने आया है। रोहिणी सेक्टर-16 के जी ब्लॉक में बुधवार शाम को एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई। इस खौफनाक हादसे के बाद पूरे रिहायशी इलाके में अफरा-तफरी, चीख-पुकार और भारी दहशत का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल तुरंत हरकत में आए और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। आधी रात बीत जाने के बाद भी मलबे के ढेर में दबी जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत कार्य लगातार जारी है, क्योंकि मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की गंभीर आशंका बनी हुई है।

एक मजदूर की मौत और पीओपी कारीगर का सफल रेस्क्यू

इस भयानक कंस्ट्रक्शन हादसे ने एक गरीब मजदूर की जान ले ली है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने भारी मशक्कत और कड़े संघर्ष के बाद मलबे के नीचे से बयालीस वर्षीय मजदूर राम किशोर को बाहर निकाला। राहतकर्मी उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। राम किशोर की मौत की खबर सुनते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया है। वहीं, इस दुखद खबर के बीच एक बड़ी राहत की खबर भी सामने आई है। मलबे के भारी जाल में फंसे पैंतीस वर्षीय रवि नाम के एक शख्स को सुरक्षित जीवित बाहर निकालने में रेस्क्यू टीम को कामयाबी मिल गई है। रवि इस ढही हुई इमारत में पीओपी (Plaster of Paris) का काम करता था और अचानक हुए इस हादसे में मलबे के नीचे दब गया था।

इमारत का मालिक राम दुआ भी मलबे में दफन

इस घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इस इमारत का मालिक राम दुआ भी भारी कंक्रीट और मलबे के नीचे बुरी तरह दबा हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब यह हादसा हुआ, उस वक्त राम दुआ खुद साइट पर मौजूद रहकर निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा ले रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, बिल्डिंग के मालिक के साथ-साथ वहां काम कर रहे करीब चार से पांच अन्य दिहाड़ी मजदूरों के भी इस विशाल मलबे में दबे होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। रात का घुप्प अंधेरा होने के बावजूद राहतकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे के नीचे फंसी हर एक जिंदगी को सकुशल बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। लापता लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे मलबे की तरफ टकटकी लगाए अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

मेयर ने बताई हादसे की असली वजह

हादसे की सूचना मिलने के बाद दिल्ली की मेयर ने खुद घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का मुआयना किया और इस खौफनाक हादसे की पूरी आधिकारिक जानकारी मीडिया के साथ साझा की। मेयर के मुताबिक, शुरुआती तकनीकी जांच में यह मुख्य वजह सामने आई है कि निर्माणाधीन इमारत का एक मुख्य पिलर (खंभा) बेहद कमजोर था। पिलर के कमजोर होने और लोड न सह पाने के कारण ही यह पूरी चार मंजिला बिल्डिंग अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बहुमंजिला इमारत का नक्शा दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से पास कराया गया था। मेयर ने मलबे में बिल्डिंग मालिक राम दुआ और एक अन्य व्यक्ति के फंसे होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है और जांच के आदेश दिए हैं।

शाम 4:28 बजे पुलिस को मिली पीसीआर कॉल

रोहिणी में हुए इस भीषण हादसे की पहली सूचना पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) को बुधवार शाम करीब चार बजकर अट्ठाईस मिनट पर मिली थी। कॉल मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमा तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। बिना एक पल की देरी किए रोहिणी के डीसीपी अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। हादसे की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल ने सबसे पहले पूरे दुर्घटनास्थल की बैरीकेडिंग करके घेराबंदी कर दी, ताकि भीड़ के कारण राहत और बचाव कार्य में कोई रुकावट न आए। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस विवादित संपत्ति की कानूनी मालिक मंजू और ऋतिका नाम की महिलाएं बताई जा रही हैं, जिन पर पुलिस ने कानूनी जांच और छानबीन शुरू कर दी है।

संकरे पाइप के जरिए पीड़ित तक पहुंचाया गया पीने का पानी और ऑक्सीजन

इस बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ और स्थानीय जांबाजों ने अद्वितीय साहस और सूझबूझ का परिचय दिया है। भारी कंक्रीट के स्लैब और लोहे के सरियों के बीच राहत टीम ने मलबे के अंदर गहराई में फंसे एक जीवित व्यक्ति से सफलतापूर्वक संपर्क स्थापित कर लिया। मलबे के नीचे दहशत और दर्द से तड़प रहे उस व्यक्ति की हिम्मत बंधाते हुए जवानों ने सबसे पहले एक छोटे छेद के रास्ते उसे पीने का पानी मुहैया कराया। इसके बाद, मलबे के दमघोंटू माहौल में सांस लेने में हो रही भारी तकलीफ को देखते हुए पुलिस ने तुरंत नजदीकी अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की। एक पतले और संकरे पाइप के जरिए मलबे के नीचे दबे शख्स तक जीवनदायिनी ऑक्सीजन पहुंचाई गई, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।

मलबा हटाने के लिए जुटीं भारी-भरकम मशीनें

कंक्रीट के विशालकाय स्लैब और सरियों के मजबूत जाल ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हाथों या छोटे कटर उपकरणों से इस पहाड़ जैसे मलबे को हटाना पूरी तरह से नामुमकिन था। इसलिए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए तत्काल कई निजी जेसीबी (JCB) मशीनों और दो बड़े हाइड्रा क्रेन (Hydra Cranes) को मोर्चे पर उतार दिया। इन भारी-भरकम मशीनों की मदद से कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़ों को बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है, ताकि नीचे दबे संभावित जीवित लोगों को कोई अतिरिक्त चोट न पहुंचे। शाम ढलने के बाद अंधेरे की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन प्रभावित न हो, इसके लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष जनरेटर मंगाकर चारों तरफ शक्तिशाली फ्लड लाइट्स और पर्याप्त रोशनी का पुख्ता इंतजाम किया है।

NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा

हादसे की भयावहता और मलबे के विशाल ढेर को देखते हुए बचाव कार्य में कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की विशेष रूप से प्रशिक्षित टीमों को मुख्य मोर्चे पर तैनात किया गया है। ये टीमें आधुनिक लाइफ डिटेक्टर उपकरणों और कटर की मदद से मलबे में दबी हर एक सांस को तलाशने में जुटी हैं। सुरक्षा के कड़े मद्देनजर और एहतियाती कदम उठाते हुए, स्थानीय प्रशासन ने ढही हुई इमारत के बिल्कुल बगल में स्थित अन्य रिहायशी मकानों को भी तुरंत खाली करवा लिया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मलबा हटाने के दौरान अगर कोई अन्य ढांचा खिसके, तो कोई दूसरा बड़ा जानलेवा हादसा न हो सके। फिलहाल सभी सुरक्षा एजेंसियों का एकमात्र लक्ष्य मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।