Delhi Pollution: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है। मंगलवार सुबह एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 286 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेने से श्वसन संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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दिल्ली के विभिन्न इलाकों में AQI की स्थिति

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में AQI का स्तर बेहद खराब दर्ज किया गया है।
अलीपुर: 289
आनंद विहार: 343
अशोक विहार: 302
आया नगर: 208
बवाना: 194
बुराड़ी: 240
चांदनी चौक: 348
डीटीयू: 284
द्वारका सेक्टर-8: 307
आईजीआई एयरपोर्ट टी3: 185
आईटीओ: 286
जहांगीरपुरी: 330
लोधी रोड: 207
मुंडका: 341
नजफगढ़: 221
नरेला: 289
पंजाबी बाग: 300
आरकेपुरम: 324
रोहिणी: 322
सोनिया विहार: 321
विवेक विहार: 334
वजीरपुर: 309
इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली के कई हिस्सों में AQI 300 के पार पहुंच चुका है, जो बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक क्या दर्शाता है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) हवा की शुद्धता और प्रदूषण के स्तर को दर्शाता है।
0 से 50: हवा साफ और सुरक्षित मानी जाती है।
51 से 100: वायु गुणवत्ता संतोषजनक होती है।
101 से 200: प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का होता है।

201 से 300: हवा ‘खराब’ श्रेणी में आती है।
301 से 400: वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में होती है।
401 से 500: हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में होती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
गंभीर श्रेणी में आने वाली हवा इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचाती है। खासकर उन लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, जो पहले से ही श्वसन रोग, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
स्वास्थ्य पर असर
‘खराब’ और ‘बेहद खराब’ श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, खांसी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है।
Delhi Pollution: खतरे में दिल्ली! कहीं ‘खराब’ तो कहीं ‘बेहद खराब’… जानें आपके इलाके में सांस लेना कितना सुरक्षित?
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









