Delhi Pollution: दिल्ली-NCR में ऑटो चलाने वालों के लिए बड़ी खबर, CNG को लेकर आया नया आदेश

दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक की तैयारी है। दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से और गुरुग्राम समेत अन्य NCR शहरों में 1 जनवरी 2028 से नए थ्री-व्हीलर के लिए केवल इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन होगा।

Delhi Pollution

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 23, 2026

Delhi Pollution: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) से चलने वाले ऑटोरिक्शा के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया है। इसके तहत पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक ऑटो (EV Auto) को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।

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चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था

सीएनजी ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की यह प्रक्रिया चरणों में पूरी की जाएगी, जिसकी शुरुआत राजधानी दिल्ली से होगी:

दिल्ली में पहला चरण (जनवरी 2027): सबसे पहले इस व्यवस्था को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लागू किया जाएगा। आगामी 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए सीएनजी ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। दिल्ली सरकार की नई ‘ईवी पॉलिसी 2.0’ में भी इसी दिशा में प्रावधान किए गए हैं, जिसके बाद केवल इलेक्ट्रिक ऑटो के नए पंजीकरण को ही मंजूरी मिलेगी।

प्रमुख एनसीआर शहर (जनवरी 2028): दिल्ली के बाद एनसीआर के अधिक वाहन घनत्व (High Vehicle Density) वाले प्रमुख शहरों का नंबर आएगा। जनवरी 2028 से नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत में नए सीएनजी ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी जाएगी।

बाकी एनसीआर जिले (जनवरी 2029): इसके बाद जनवरी 2029 से एनसीआर के शेष सभी जिलों में भी नए सीएनजी ऑटो के पंजीकरण पर प्रतिबंध प्रभावी हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पूरे एनसीआर क्षेत्र में नए तीन पहिया वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक विकल्प ही प्राथमिकता बन जाएगा। हालांकि, यह नियम नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर लागू होगा, जबकि मौजूदा सीएनजी ऑटो को लेकर नियम अलग हो सकते हैं।

इस फैसले के पीछे मुख्य कारण

सीएकुम (CAQM) के अनुसार, इस कड़े कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला खतरनाक पीएम2.5 (PM2.5) प्रदूषण है:

प्रदूषण में हिस्सेदारी: आंकड़ों के मुताबिक, नई गाड़ियों की कुल बिक्री में तीन पहिया वाहनों की हिस्सेदारी भले ही करीब 2.2 प्रतिशत है, लेकिन एनसीआर क्षेत्र में पीएम2.5 उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 19% तक आंकी गई है।

उत्सर्जन में कमी: आयोग का अनुमान है कि यदि ऑटो का पूरा बेड़ा इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील हो जाता है, तो एनसीआर की हवा में हर साल करीब 5.5 टन पीएम2.5 उत्सर्जन को कम किया जा सकेगा।

ऑटो के अलावा हल्के मालवाहक वाहनों (Light Commercial Vehicles) को भी इस दायरे में लाया जा रहा है। दिल्ली और उच्च वाहन घनत्व वाले एनसीआर जिलों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी से चलने वाले कुछ मालवाहक वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन पर भी चरणबद्ध पाबंदी लगाई जाएगी।

सीएकुम के अधिकारियों के अनुसार, एनसीआर के अन्य हिस्सों में इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुकूल चार्जिंग बुनियादी ढांचा (Charging Infrastructure) तैयार करने में समय लग रहा है, इसी वजह से वहां इस व्यवस्था को कुछ समय बाद लागू करने का निर्णय लिया गया है।

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