Delhi Politics: कांग्रेस को मिला नोटिस, लुटियंस दिल्ली के ऐतिहासिक मुख्यालय पर सियासी संकट

कांग्रेस को एस्टेट विभाग ने 28 मार्च तक 24 अकबर रोड मुख्यालय खाली करने का नोटिस भेजा है, जो 1978 से पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 25, 2026

Delhi Politics: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को अपने दशकों पुराने मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का नोटिस मिला है। एस्टेट विभाग ने हाल ही में पार्टी को बेदखली का आदेश जारी किया है, जिसमें 28 मार्च तक परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।

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कांग्रेस का पुराना मुख्यालय

1978 से कांग्रेस का मुख्यालय रहा अकबर रोड स्थित यह बंगला लगभग 48 वर्षों से पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। हालांकि, पिछले साल पार्टी ने कोटला मार्ग स्थित अपने नए दफ्तर इंदिरा भवन में शिफ्ट कर लिया था, लेकिन इसके बावजूद अकबर रोड परिसर का उपयोग अब भी जारी है।

एस्टेट विभाग का नोटिस

एस्टेट विभाग ने बुधवार को जारी नोटिस में साफ कहा है कि 24 अकबर रोड के साथ-साथ 5 रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस (Indian Youth Congress) का दफ्तर भी 28 मार्च तक खाली किया जाए। यह बंगला भी कांग्रेस के नाम पर आवंटित था और इसका उपयोग उसकी सहयोगी इकाई द्वारा किया जा रहा था।

अदालत जाने की तैयारी

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कदम को ‘गैरकानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताया। उन्होंने कहा कि इस नोटिस के खिलाफ सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।

कांग्रेस का तर्क

कांग्रेस का कहना है कि अकबर रोड स्थित यह संपत्ति उसकी विरासत का अहम हिस्सा है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, इस बंगले के लिए कांग्रेस बाजार दर पर किराया भी चुकाती रही है। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद इस संपत्ति को पार्टी के किसी वरिष्ठ सांसद को आवंटित कराने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हम दोनों पते (अकबर रोड और नया मुख्यालय) को बनाए रखना चाहते हैं। यह हमारी राजनीतिक यात्रा और इतिहास का हिस्सा है।”

सियासी हलचल

इस नोटिस के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अगर कांग्रेस को यह परिसर खाली करना पड़ता है, तो यह लुटियंस दिल्ली के राजनीतिक नक्शे में बड़ा बदलाव होगा। दशकों से कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी वाले इस इलाके में पार्टी का मुख्यालय खाली होना एक ऐतिहासिक घटना मानी जाएगी।

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