Delhi Missing Case: क्या दिल्ली में वाकई गायब हो रहे हैं हजारों लोग? पुलिस ने बताई सच्चाई

दिल्ली में 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच 807 लोगों के लापता होने की खबर ने सनसनी फैला दी है। सोशल मीडिया पर इसे मानव तस्करी और असुरक्षा से जोड़ा जा रहा है। अब दिल्ली पुलिस ने सामने आकर इन अफवाहों को खारिज किया है और पिछले वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े पेश किए हैं।

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 5, 2026

Delhi Missing Case: देश की राजधानी में लापता लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर सोशल मीडिया और आम जनता के बीच व्याप्त चिंता पर दिल्ली पुलिस ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने एक प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों की गुमशुदगी के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है। पुलिस के अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पहले की तुलना में रिपोर्टिंग के आंकड़ों में कोई अप्रत्याशित उछाल नहीं आया है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि पुलिस तंत्र पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहा है।

जनवरी 2026 के आंकड़ों में आई गिरावट: पुलिस का दावा

आमतौर पर यह माना जा रहा था कि पिछले कुछ समय में गुमशुदगी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पुलिस के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। जॉइंट कमिश्नर ने बताया कि जनवरी 2026 माह में, पिछले वर्षों की इसी समान अवधि की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में वास्तव में कमी दर्ज की गई है। पुलिस ने इन दावों को खारिज किया कि शहर में कोई सुरक्षा संकट खड़ा हो गया है। उनके अनुसार, बढ़ती रिपोर्टिंग इस बात का संकेत है कि अब लोग ऑनलाइन और अन्य माध्यमों का उपयोग कर पुलिस तक अधिक सुगमता से पहुँच रहे हैं, न कि अपराध बढ़ने का।

त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष दस्ते और प्रभावी SOP

लापता व्यक्तियों को खोजने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक विस्तृत और प्रभावी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया है। पुलिस ने जानकारी दी कि अब गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराना बेहद सरल हो गया है। लोग न केवल स्थानीय पुलिस थाने जा सकते हैं, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल और आपातकालीन नंबर ‘ERSS-112’ के माध्यम से भी तुरंत सूचना दे सकते हैं। पुलिस तंत्र में लापता बच्चों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इस कार्य के लिए प्रत्येक जिले में ‘डेडिकेटेड मिसिंग पर्सन स्क्वाड’ तैनात किए गए हैं और क्राइम ब्रांच के तहत ‘एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट’ भी सक्रिय है, जो ऐसे मामलों में केंद्रित कार्रवाई सुनिश्चित करती है।

संगठित गिरोह की सक्रियता से पुलिस का इनकार

शहर में इस तरह की अफवाहें जोर पकड़ रही थीं कि बच्चों के अपहरण के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब तक की जांच में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। पुलिस ने लोगों से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी असत्यापित सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। साथ ही, यह चेतावनी भी दी गई है कि जो लोग सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से गलत जानकारी फैलाकर जनता में दहशत पैदा करेंगे, उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आंकड़ों की हकीकत: हर दिन गुम होते दर्जनों लोग

भले ही पुलिस ने स्थिति को सामान्य बताया हो, लेकिन 2026 के पहले 27 दिनों के आंकड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी के शुरुआती 27 दिनों में दिल्ली से कुल 807 लोग लापता हुए हैं, जिसका औसत प्रतिदिन 29 से अधिक लोगों का आता है। संतोषजनक बात यह है कि पुलिस ने इनमें से 235 लोगों को सुरक्षित ढूंढ लिया है, लेकिन 572 लोग अभी भी लापता हैं। सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह है कि गायब होने वालों में 137 बच्चे शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश किशोरियां हैं। इन आंकड़ों ने ‘लापतागंज’ बनती दिल्ली में सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया है।

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