Delhi News: हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी (AAP) के अंदर चल रहे सियासी घटनाक्रम ने पार्टी और दिल्ली के राजनीति के माहौल को हिला दिया है। राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाना और राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश करना इस बात का संकेत है कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर केजरीवाल उनसे इतने नाराज हैं, तो सीधे तौर पर उन्हें पार्टी से बाहर क्यों नहीं कर पा रहे? इसके पीछे कई राजनीतिक और कानूनी कारण हैं।
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पार्टी से निष्कासन बनाम राज्यसभा सदस्यता
राज्यसभा का नियम इस मामले को जटिल बनाता है। किसी सांसद को पार्टी से निकालने पर भी उनकी सदन में सदस्यता खत्म नहीं होती। ऐसे सांसद ‘अनअटैच्ड’ सदस्य कहलाते हैं और वे सदन में पार्टी की नीतियों के खिलाफ बोल सकते हैं। इसलिए, अगर केजरीवाल राघव को पार्टी से निकालते हैं, तो वे राज्यसभा में स्वतंत्र होकर पार्टी की नीतियों के खिलाफ आ सकते हैं।
सांसद की सदस्यता केवल दो स्थितियों में खत्म होती है: यदि सांसद स्वयं पार्टी से इस्तीफा दे दें या पार्टी व्हिप के उल्लंघन के दौरान वोटिंग करें या गैरहाजिर रहें। केजरीवाल चाहते हैं कि राघव स्वयं इस्तीफा दें, लेकिन राघव ने साफ किया है कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे।
‘व्हिप’ और बोलने की पाबंदी
AAP ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव को बोलने का समय न देने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य उन्हें पार्टी में रहते हुए ‘बेअसर’ बनाना है। यदि वे किसी महत्वपूर्ण बिल पर पार्टी के खिलाफ वोट करते हैं, तभी पार्टी उन्हें अयोग्य घोषित करा सकती है।
केजरीवाल की रणनीति और मजबूरियां
राघव चड्ढा को तुरंत निकालने पर वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं और पार्टी की अंदरूनी रणनीतियों को साझा कर सकते हैं। इसलिए, केजरीवाल उन्हें किनारे कर उनकी ताकत घटाने की नीति पर काम कर रहे हैं। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की पार्टी में रणनीतिक भूमिका रही है। उन्हें निकालने से पंजाब यूनिट में दरार पड़ सकती है और राज्यसभा में पार्टी की ताकत कमजोर हो सकती है।
राघव युवा, पढ़ा-लिखा और सौम्य चेहरा हैं। उन्हें निकालने पर वे ‘विक्टिम कार्ड’ खेल सकते हैं, जो जनता में गलत संदेश जा सकता है। इसके अलावा, राघव कई सालों तक केजरीवाल के करीबी रहे हैं और पार्टी के फंड और रणनीतियों से जुड़े रह चुके हैं। उन्हें निकालना पार्टी के लिए जोखिम भरा है।
नाराजगी के कारण
सूत्रों के अनुसार राघव की नाराजगी और नेतृत्व से दूरी के पीछे कई कारण हैं:
जरूरी मौकों पर चुप्पी, जैसे शराब नीति मामले में जश्न के समय राघव की सोशल मीडिया पर कमी।
पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत ब्रांड पर ध्यान, जैसे एयरपोर्ट पर खाने की कीमत और गिग वर्कर्स के मुद्दे।
अनुशासनहीनता का आरोप, जब केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय राघव लंदन में सर्जरी के लिए थे।
राघव चड्ढा ने कहा है कि वे “हारे नहीं हैं।” वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे पर चुटकी लेते हुए केजरीवाल को ‘योग्य नेताओं से डरने वाला’ बताया। आने वाले दिनों में AAP के इस आंतरिक विवाद का राजनीतिक परिदृश्य पर असर देखने योग्य होगा।










