Delhi News: दिल्ली में हालिया राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आयोजनों के बीच केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर ऐतिहासिक जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हमेशा के लिए हटा दिया गया है। पिछले करीब 33 वर्षों से जंतर-मंतर देश की राजधानी में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम जनता के धरना-प्रदर्शन का मुख्य केंद्र रहा है।
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नए प्रदर्शन स्थलों का ऐलान

गृह मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, दिल्ली में अब विरोध प्रदर्शनों और सभाओं के लिए तीन नए स्थान तय किए गए हैं:
रामलीला मैदान
बुराड़ी मैदान
सीबीजी मैदान (पूर्वी दिल्ली)

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की पुरानी अनुमति को रद्द कर दिया गया है। इससे पहले ब्रिटिशकाल और शुरुआती दशकों में इंडिया गेट का ‘बोट क्लब’ विरोध प्रदर्शनों का मुख्य स्थल हुआ करता था, जिसे बाद में बदलकर जंतर-मंतर किया गया था और अब इसे भी सूची से बाहर कर दिया गया है।
पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में हुआ बदलाव
दिल्ली पुलिस का यह नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक संशोधन करता है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य राजधानी में प्रदर्शनों के लिए निश्चित जगहों को और अधिक स्पष्ट करना तथा यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना है। हालांकि, नए आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया, भाग लेने वाले लोगों की अधिकतम संख्या और अन्य जरूरी शर्तों को लेकर विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी।
जंतर-मंतर को सूची से हटाने की वजह

आदेश के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर पर लगातार बढ़ने वाले यातायात दबाव और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों की पहचान के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी।
कमेटी की इन्हीं सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि जंतर-मंतर के मध्य दिल्ली में स्थित होने के कारण अक्सर वीवीआईपी मूवमेंट और आम जनता को भारी ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब नए परिसरों के तय होने से राजधानी की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन में सुधार होने की उम्मीद है।
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