Rahul Gandhi: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष केंद्र की मोदी सरकार पर पूरी तरह हमलावर हो चुका है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (12 अक्टूबर) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक तीखा और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को यह बात समझनी चाहिए कि वे मुख्य अपराधी नहीं हैं, इसलिए उन्हें ‘अप्रूवर’ बन जाना चाहिए।
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‘आप मुख्य अपराधी नहीं, आपको माफ किया जा सकता है’

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मेरा साफ संदेश है कि आप ‘अप्रूवर’ बन जाइए, क्योंकि आप मुख्य अपराधी नहीं हैं। आपने गलती की है, लेकिन इसके बावजूद हम आपको छोड़ सकते हैं और माफ कर सकते हैं। हम अच्छी तरह जानते हैं कि आप पर भारी दबाव है।”
राहुल गांधी ने आगे कहा कि हम क्रूर लोग नहीं हैं, बल्कि हम गलतियां करने वाले इंसानों को माफ करना जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 4-5 दिनों से देश भर में वोट चोरी और चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ जनता का बड़ा सार्वजनिक आंदोलन चल रहा है। हालांकि, सरकार के खिलाफ यह प्रतिरोध और विरोध प्रदर्शन पिछले 10-12 सालों से अलग-अलग स्तर पर चल रहा था, जो अब पूरी तरह खुलकर सामने आ रहा है।
‘बीजेपी और आरएसएस के गुंडे महिलाओं पर कर रहे हैं हमला’

कानून-व्यवस्था और हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के गुंडे सड़कों पर महिलाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे हैं और उन पर हमले किए जा रहे हैं।
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि एक तरफ दिल्ली पुलिस को यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे देशहित की आवाज उठाने वाले देशभक्त युवाओं पर सख्ती करें और उन्हें पीटें, वहीं दूसरी तरफ आरएसएस और बीजेपी के उपद्रवियों को पूरी छूट दी जा रही है। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहा, तो पुलिस ने उन्हें रोका और कहा कि वे अपने घरों के अंदर जाकर विरोध प्रदर्शन करें।
उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पुलिस से कहा कि वे दिल्ली में कोई भी दूसरी जगह तय कर दें, तो अधिकारियों ने साफ मना कर दिया। इसके अगले दिन जब विपक्ष के नेताओं ने जंतर-मंतर जाने की कोशिश की, तो उन्हें वहां भी रोक दिया गया और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद सभी विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी की समाधि स्थल पर अपना विरोध दर्ज कराया।
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