Sameer Wankhede Netflix:समीर वानखेड़े को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, नेटफ्लिक्स सीरीज पर रोक से इनकार

आर्यन खान के निर्देशन में बनी पहली नेटफ्लिक्स सीरीज 'द बैस्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड' को लेकर समीर वानखेड़े की कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। क्या यह आर्यन खान के लिए बड़ी राहत है या वानखेड़े अब मुंबई का रुख करेंगे?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 29, 2026

Sameer Wankhede Netflix: दिल्ली हाई कोर्ट ने IRS अधिकारी समीर वानखेड़े द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज़ बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड में अपने कथित बदनाम करने वाले चित्रण को चुनौती दी थी। यह सीरीज़ आर्यन खान के निर्देशन में बनी बताई गई है। कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) के आधार पर मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया।

सक्षम कोर्ट में जाने की दी गई छूट

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी आधार पर शिकायत को खारिज करते हुए वानखेड़े को यह स्वतंत्रता दी गई कि वे सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में अपनी याचिका दोबारा दाखिल कर सकते हैं।अंतरिम रोक की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो प्रमुख सवाल तय किए थे। पहला, क्या यह मामला दिल्ली में सुनवाई योग्य है, और दूसरा, क्या सीरीज़ में दिखाया गया कथित चित्रण पूरे संदर्भ में देखने पर सुरक्षित कलात्मक अभिव्यक्ति की सीमा से बाहर जाकर वानखेड़े की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है।

वकीलों की दलीलें और पक्ष

समीर वानखेड़े की ओर से सीनियर एडवोकेट जे. साई दीपक ने दलीलें पेश कीं। वहीं, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की तरफ से सीनियर वकील नीरज किशन कौल और नेटफ्लिक्स की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव नैयर कोर्ट में पेश हुए।वानखेड़े की ओर से कहा गया कि मामला दिल्ली में भी चल सकता है क्योंकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई दिल्ली में लंबित है। इसके अलावा, कई बड़े मीडिया हाउस दिल्ली में स्थित हैं जिन्होंने उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित की थीं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

रेड चिलीज़ ने किया क्षेत्राधिकार का विरोध

रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट ने इस तर्क का कड़ा विरोध किया। कंपनी की ओर से कहा गया कि चूंकि वानखेड़े मुंबई में रहते हैं और रेड चिलीज़ का पंजीकृत कार्यालय भी वहीं है, इसलिए इस केस की सुनवाई का सही मंच बॉम्बे हाई कोर्ट होना चाहिए, न कि दिल्ली।कौल ने यह भी कहा कि सिर्फ यह तर्क देना कि इंटरनेट पर डाले गए कंटेंट की पहुंच हर जगह है, मानहानि का मामला साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ठोस कानूनी मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।

नेटफ्लिक्स ने मानहानि के आरोपों को नकारा

नेटफ्लिक्स ने अंतरिम रोक की मांग का विरोध करते हुए कहा कि मानहानि के मामलों में मानक बहुत ऊंचे होते हैं, जिन्हें शुरुआती स्तर पर साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वानखेड़े से जुड़े आरोप 2022 से सार्वजनिक डोमेन में हैं।नेटफ्लिक्स की ओर से यह भी दलील दी गई कि सीरीज़ का उद्देश्य सटायर और डार्क कॉमेडी के जरिए बॉलीवुड संस्कृति को उजागर करना है, जिसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए।

2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग

वानखेड़े ने याचिका में 2 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी, जिसे उन्होंने टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल को दान करने की बात कही थी। इसके अलावा, सीरीज़ के कथित आपत्तिजनक हिस्सों पर स्थायी रोक लगाने की भी मांग की गई थी।वानखेड़े का आरोप था कि यह सीरीज़ उनकी छवि को जानबूझकर खराब करने के इरादे से बनाई गई है, खासकर तब जब आर्यन खान से जुड़ा मामला अब भी अदालतों में विचाराधीन है।दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि समीर वानखेड़े के लिए कानूनी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। वे अब सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में जाकर अपनी शिकायत आगे बढ़ा सकते हैं।