Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर वह सभी कंटेंट हटा दें, जिसमें हिमायनी पुरी को अमेरिकी अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ा गया है।
Delhi Fire: सुबह-सुबह दिल्ली के नेचर बाजार में आग ने लिया विकराल रूप, दमकल की 9 गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
मानहानि याचिका के बाद कोर्ट का हस्तक्षेप
यह मामला तब सामने आया जब हिमायनी पुरी ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि कई ऑनलाइन रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स और वीडियो में उनके बारे में गलत और भ्रामक जानकारी फैलायी जा रही है। इन सामग्रियों में उन्हें जेफरी एपस्टीन और उसकी आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने का दावा किया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया।
याचिका में हिमायनी पुरी ने कहा कि इस तरह की झूठी खबरें और आरोप उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन अफवाहों के कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और समाज में उनकी छवि प्रभावित हुई है।
कोर्ट का स्पष्ट निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिनी पुष्करणा ने सख्त निर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि संबंधित सभी प्लेटफॉर्म्स को 24 घंटे के भीतर ऐसा कंटेंट हटाना होगा, जो हिमायनी पुरी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ता है। इसके साथ ही कोर्ट ने भविष्य में इस तरह की सामग्री के प्रकाशन और प्रसार पर भी रोक लगा दी है।
कोर्ट का यह आदेश न केवल मौजूदा सामग्री को हटाने तक सीमित है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि भविष्य में ऐसी कोई भी पोस्ट या रिपोर्ट प्रकाशित न हो, जो गलत तथ्यों पर आधारित हो।
10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
हिमायनी पुरी ने अपनी याचिका में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस गलत जानकारी के प्रसार से उन्हें मानसिक और सामाजिक नुकसान हुआ है। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि संबंधित पक्षों को भविष्य में इस तरह के आरोपों को दोहराने से रोका जाए।
सोशल मीडिया कंपनियों पर भी कार्रवाई की मांग
याचिका में हिमायनी पुरी ने कई सोशल मीडिया कंपनियों और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि दुनिया भर के विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद सभी आपत्तिजनक पोस्ट, लेख और वीडियो हटाए जाएं।










